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Jharkhand

गढ़वा से लापता बेटी 15 साल बाद लौटी घर,देवघर DC और CWC की मेहनत लाई रंग 

Samir Hussain
Samir Hussain
सीनियर रिपोर्टर

 

देवघर प्रशासन और बाल कल्याण समिति (CWC) की संवेदनशील पहल ने एक परिवार को 15 साल बाद उसकी बेटी से मिला दिया.गढ़वा जिले के रमना प्रखंड के चटनियां गांव की रहने वाली वृंदा कुमारी वर्ष 2011 में महज 15 वर्ष की उम्र में मानसिक अस्वस्थता के कारण अपने परिवार से बिछड़ गई थीं.लंबे समय तक खोजबीन के बावजूद जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी.

लेकिन देवघर उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया के दिशा-निर्देश और बाल कल्याण समिति के लगातार प्रयासों से वर्षों पुरानी यह तलाश आखिरकार पूरी हुई. 25 सितंबर 2026 को वृंदा को सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उनके गृह जिले गढ़वा में परिजनों को सौंप दिया गया.

2011 में भटककर पहुंची थीं हावड़ा

वृंदा वर्ष 2011 में भटकते हुए पश्चिम बंगाल के हावड़ा पहुंच गई थीं। उस समय वह ठीक से बोल नहीं पा रही थीं.हावड़ा की बाल कल्याण समिति ने उन्हें करीब एक वर्ष तक अपने आश्रय में रखा. इसके बाद वर्ष 2012 में उन्हें देवघर स्थित बालिका गृह स्थानांतरित कर दिया गया.

इलाज और काउंसिलिंग से लौटीं पुरानी यादें

देवघर बालिका गृह में रहने के दौरान वृंदा की देखभाल और इलाज पर विशेष ध्यान दिया गया. उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया की निगरानी में उनका रांची स्थित RINPAS (रिनपास) में नियमित उपचार कराया गया.

उचित चिकित्सा, देखभाल और काउंसिलिंग के बाद उनकी मानसिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगा. इसी दौरान उन्हें अपने घर और परिवार से जुड़ी कुछ धुंधली यादें आने लगीं.इन छोटी-छोटी जानकारियों को आधार बनाकर प्रशासन और CWC ने उनके परिवार की तलाश शुरू की.

2026 में मिला परिवार का सुराग

वृंदा से मिली जानकारी के आधार पर उपायुक्त के निर्देश पर देवघर CWC ने गढ़वा के रमना थाना प्रभारी और स्थानीय मुखिया से संपर्क किया.इसके बाद स्थानीय स्तर पर गहन खोजबीन शुरू की गई.

लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार वृंदा के परिवार का पता लगा लिया गया. परिवार ने वर्षों पहले यह मान लिया था कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है. ऐसे में जब उन्हें वृंदा के सुरक्षित होने और मिलने की खबर मिली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

25 सितंबर को हुआ भावुक पुनर्मिलन

सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 25 सितंबर 2026 को वृंदा को रमना थाना परिसर में उनके परिजनों को सौंप दिया गया. 15 साल के लंबे इंतजार के बाद अपनी बेटी को सामने देखकर परिवार भावुक हो उठा.

रिपोर्ट: प्रशांत कुमार