देवघर (DEOGHAR): अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के दान को लेकर सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच झारखंड की धार्मिक नगरी देवघर से एक नई मांग उठी है. बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर स्थित श्रीराम मंदिर में ऋषि ब्रह्मर्षि सांस्कृतिक मंच की ओर से 'क्षमा याचना हवन' का आयोजन किया गया. इस दौरान मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि भगवान श्रीराम के नाम पर एकत्रित दान राशि के उपयोग को लेकर लगाए गए आरोपों में सच्चाई है, तो यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय है. उन्होंने राम मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल प्रमुख लोगों से अयोध्या जाकर भगवान श्रीराम के समक्ष क्षमा मांगने की अपील की, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भगवान श्रीराम और देशवासियों से माफी मांगने की बात काही गई है.
बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस हवन को मंच ने केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के प्रति नैतिक जिम्मेदारी का प्रतीक बताया. मंच के सदस्यों का कहना था कि श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनके नाम पर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी श्रद्धा के अनुसार दान दिया. ऐसे में यदि दान राशि के उपयोग को लेकर किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न होता है, तो उससे श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित होती हैं.
मंच ने कहा कि राम मंदिर निर्माण, भूमि खरीद और वित्तीय लेन-देन को लेकर समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठते रहे हैं. कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी पारदर्शिता की मांग की थी. हालांकि, संबंधित पक्ष पहले भी इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें निराधार बता चुके हैं. मंच का कहना है कि किसी भी आरोप की सच्चाई का पता निष्पक्ष जांच से ही चल सकता है.
हवन के बाद ऋषि ब्रह्मर्षि सांस्कृतिक मंच के महासचिव मणिशंकर ने कहा कि यदि राम मंदिर कोष से जुड़े आरोपों में सच्चाई का कोई भी अंश है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और तथ्य देश के सामने आने चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि जांच के बाद नैतिक जवाबदेही बनती है, तो संबंधित लोगों को भगवान श्रीराम और देशवासियों से क्षमा मांगनी चाहिए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंच का उद्देश्य किसी धर्म या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि आस्था से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करना है.
मंच का कहना है कि धर्म की सबसे बड़ी शक्ति लोगों का विश्वास होता है और यह विश्वास तभी मजबूत रह सकता है, जब धार्मिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता बनी रहे. वक्ताओं ने कहा कि किसी भी आरोप का अंतिम सत्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आ सकता है, इसलिए बिना तथ्यों के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा. देवघर में आयोजित यह कार्यक्रम अब धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इस मांग पर संबंधित पक्षों की क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या इस मुद्दे पर आगे किसी प्रकार की जांच या पहल होती है.
रिपोर्ट : ऋतुराज सिन्हा
