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Jharkhand

अवैध बालू परिवहन के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश, पुलिस को भी गांव से खदेड़ा

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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चाईबासा (CHAIBASA): पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर ओपी क्षेत्र अंतर्गत रोलाडीह गांव में मंगलवार को अवैध बालू के कारोबार को लेकर ग्रामीणों और कथित बालू माफियाओं के बीच तनाव भड़क गया. गांव की सड़क से अवैध बालू लदे ट्रैक्टरों की लगातार आवाजाही से परेशान ग्रामीणों ने जब इसका विरोध किया, तो विवाद इतना बढ़ गया कि मौके पर पहुंची पुलिस को भी ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा. ग्रामीणों ने पुलिस पर बालू माफियाओं का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए उसे भी गांव से बाहर खदेड़ दिया.

इस घटना ने क्षेत्र में अवैध बालू परिवहन पर प्रशासन की कथित निष्क्रियता और पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि वे लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी परेशानी दूर करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. आखिरकार, जब उनकी आवाज अनसुनी होती रही, तो ग्रामीणों को खुद सड़क पर उतरकर विरोध करने के लिए मजबूर होना पड़ा.ग्रामीण मुंडा वीरेंद्र कालुंडिया के अनुसार, इस समस्या को लेकर कई बार थाने में शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

ग्रामीणों का दावा है कि प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रैक्टर गांव की सड़क से गुजरते हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है. उनका आरोप है कि विरोध करने पर कुछ ट्रैक्टर चालक धमकी भी देते हैं. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि बालू का परिवहन वैध है, तो ट्रैक्टर मुख्य सड़क के बजाय गांव के अंदर से क्यों गुजरते हैं. उन्होंने एनजीटी की रोक के दौरान भी बालू परिवहन जारी रहने का आरोप लगाया है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव के अंदर से बालू लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही रोकने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि गांव की सड़क पर लगातार भारी वाहनों के चलने से किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है. वहीं, मौके पर मौजूद तांतनगर ओपी प्रभारी अरविंद कुमार कुशवाहा ने गांव से ट्रैक्टरों की आवाजाही रोकने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही. अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और गांव में सुरक्षा व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाती है.

रिपोर्ट- संतोष वर्मा