Jharkhand

चक्रधरपुर में पुलिया निर्माण पर उठे सवाल, बालू की जगह स्टोन डस्ट से ढलाई का आरोप

Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor
चक्रधरपुर में पुलिया निर्माण पर उठे सवाल, बालू की जगह स्टोन डस्ट से ढलाई का आरोप

चाईबासा (CHIBASA) : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर शहर में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही पुलिया के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है. स्थानीय वार्ड पार्षद सपन मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि पुलिया की ढलाई में बालू की जगह स्टोन डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है.

कमजोर बन रही है पुलिया

यह मामला चक्रधरपुर की पुरानी बस्ती स्थित बलिया घाट में बन रही पुलिया से जुड़ा है. सपन मिस्त्री ने ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल को लिखित शिकायत देकर कहा है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है. उनका कहना है कि बालू की जगह स्टोन डस्ट का उपयोग किए जाने से पुलिया कमजोर बन रही है और इसकी उम्र भी कम हो जाएगी.

क्षतिग्रस्त हो सकती है पुलिया

वार्ड पार्षद ने आशंका जताई है कि तेज बारिश या नदी में बाढ़ आने की स्थिति में यह पुलिया क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे लोगों की जान-माल को खतरा पैदा हो सकता है. उन्होंने प्रशासन से तत्काल निर्माण कार्य रोकने और अब तक हुए निर्माण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है.

स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए

सपन मिस्त्री ने यह भी कहा है कि यदि जांच में स्टोन डस्ट के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो उस हिस्से को तोड़कर दोबारा गुणवत्तापूर्ण सामग्री से निर्माण कराया जाए. उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.

पहले भी सामने आते रहे हैं

गौरतलब है कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में पुलिया निर्माण में अनियमितता के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. कई पुलिया कुछ वर्षों के भीतर ही धंस गईं या उपयोग के लायक नहीं रहीं. ऐसे मामलों में अक्सर प्रशासन पर केवल औपचारिक कार्रवाई करने का आरोप लगता रहा है.

इनकार नहीं किया जा सकता

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सरकारी धन की बर्बादी के साथ-साथ भविष्य में किसी बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता. अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि शिकायत के बाद निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.

रिपोर्ट - संतोष वर्मा