Jharkhand

सारंडा से निकले गजराज! किरीबुरू-मेघाहातुबुरु में हाथियों का बढ़ा मूवमेंट, खदानों और रिहायशी इलाकों में दहशत

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
सारंडा से निकले गजराज! किरीबुरू-मेघाहातुबुरु में हाथियों का बढ़ा मूवमेंट, खदानों और रिहायशी इलाकों में दहशत

चाईबासा (CHAIBASA): पश्चिमी सिंहभूम के सेल संचालित किरीबुरू और मेघाहातुबुरु क्षेत्र में पिछले दो दिनों से जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही ने स्थानीय लोगों और खदान कर्मियों की चिंता बढ़ा दी है. हाथियों के बार-बार खदानों और रिहायशी इलाकों में पहुंचने से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार, 29 जून की रात करीब 11 बजे एक जंगली हाथी किरीबुरू-हिलटॉप मुख्य मार्ग पार करते हुए सेल की मेघाहातुबुरु खदान के मैकेनिकल शॉवेल सेक्शन तक पहुंच गया. अचानक हाथी को खदान परिसर में देख वहां कार्यरत कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई और सभी सुरक्षित स्थानों की ओर भाग गए. कुछ देर तक खदान क्षेत्र में घूमने के बाद हाथी वापस जंगल की ओर लौट गया. इससे पहले उसे मुर्गापाड़ा इलाके में भी देखा गया था.

ड्रोन से की जा रही निगरानी
अगली सुबह करीब 5:30 बजे वही हाथी पुराने मैगजीन हाउस के पास मुख्य सड़क किनारे जंगल में दिखाई दिया. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. विभाग के कर्मी शंकर पांडेय ने बताया कि हाथी की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से घने जंगल की ओर भेजा जा सके. इसी दिन दोपहर करीब 12 बजे एक अन्य दंतैल हाथी सेल किरीबुरू खदान के हिलटॉप स्थित डालमिया (ओडिशा) के पानी फिल्टर प्लांट के पीछे से परिसर में घुस आया. हाथी को देखते ही कर्मचारियों और मजदूरों में भगदड़ मच गई. हालांकि कुछ देर बाद वह बिना किसी नुकसान के मुख्य गेट से बाहर निकलकर जंगल की ओर चला गया.

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, प्लांट में पहुंचने से पहले इसी हाथी ने जंगल किनारे बकरियां चरा रही एक महिला का पीछा किया. जान बचाने के लिए भागते समय महिला गिर गई, लेकिन किसी तरह खुद को संभालते हुए सुरक्षित निकलने में सफल रही. घटना के बाद डालमिया क्षेत्र और आसपास के गांवों में लोगों के बीच डर का माहौल है. कई ग्रामीण खेतों और जंगल की ओर जाने से भी बच रहे हैं. वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि हाथियों के नजदीक जाने या उन्हें उकसाने की कोशिश न करें. यदि कहीं हाथी दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें. साथ ही लोगों से भीड़ नहीं लगाने और पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सारंडा के जंगलों में भोजन और पानी की कमी के कारण जंगली हाथी लगातार रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं. यदि समय रहते प्रभावी प्रबंधन और दीर्घकालिक समाधान नहीं अपनाए गए, तो आने वाले दिनों में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में और वृद्धि हो सकती है.

रिपोर्ट : संतोष वर्मा