Jharkhand

सारंडा में शिक्षा संकट गहराया, स्कूल बस रोककर बच्चों और ग्रामीणों का प्रदर्शन,जानिए पूरी खबर

Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Sr. Copy Editor

चाईबासा (CHIBASA) : नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र के करमपदा, थोलकोबाद और आसपास के गांवों में स्कूली बच्चों की शिक्षा एक बार फिर संकट में है. लंबे समय से स्कूल बस की समस्या का समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने करमपदा में सेल किरीबुरू प्रबंधन की स्कूल बस रोककर विरोध-प्रदर्शन किया. यह इस मुद्दे को लेकर दूसरा प्रदर्शन था.

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बच्चों के लिए पर्याप्त स्कूल बस और स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा की व्यवस्था नहीं होगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा. उनका आरोप है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद न तो सेल प्रबंधन और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है. इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.

प्रत्येक बस में लगभग 80 बच्चे

ग्रामीण देवधारी कुमार ने बताया कि वर्तमान में सेल प्रबंधन केवल दो स्कूल बसों का संचालन कर रहा है. इन बसों से करमपदा, थोलकोबाद समेत करीब 15 गांवों के बच्चे किरीबुरू के विभिन्न स्कूलों में पढ़ने जाते हैं. प्रत्येक बस में लगभग 80 बच्चे सफर करते हैं. क्षमता पूरी होने के बाद सुरक्षा कारणों से चालक अतिरिक्त बच्चों को नहीं बैठाता, जिससे कई छात्र-छात्राएं रोज स्कूल नहीं पहुंच पाते.

पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश गांवों में हाई स्कूल नहीं है. ऐसे में बच्चों को 25 से 40 किलोमीटर दूर किरीबुरू जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है. बसों की कमी और लंबी दूरी के कारण उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है.

ग्रामीणों ने तीन प्रमुख मांगें रखीं

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने तीन प्रमुख मांगें रखीं. पहली, सीएसआर योजना के तहत तत्काल एक अतिरिक्त स्कूल बस उपलब्ध कराई जाए. दूसरी, करमपदा स्कूल को 10वीं कक्षा तक और तीसरी, थोलकोबाद स्कूल को 8वीं कक्षा तक उत्क्रमित किया जाए.

किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं

ग्रामीणों ने सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और सेल प्रबंधन से जल्द हस्तक्षेप की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. उनका कहना है कि नक्सल प्रभावित सारंडा के विकास की सबसे मजबूत नींव शिक्षा है और बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.

रिपोर्ट – संतोष वर्मा