चाईबासा (BIHAR) : मेघाहातुबुरू दौरे पर पहुंचे झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और अवैध बालू खनन को लेकर तीखा हमला बोला. वहीं, इसी कार्यक्रम में आदिवासी हो समाज युवा महासभा ने उन्हें स्मरण पत्र सौंपकर केंद्र सरकार से हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और अलग सरना धर्म कोड लागू करने की मांग उठाई.
मरांडी ने कहा कि राज्य में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अपराध रोकने के बजाय अवैध कोयला और बालू कारोबार से जुड़ी गतिविधियों में व्यस्त है. उनके अनुसार, राज्य में आम लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधा
अवैध बालू खनन का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी निशाना साधा. उनका आरोप था कि पूरे राज्य में अवैध बालू का कारोबार खुलेआम चल रहा है और इससे होने वाली कमाई का फायदा सत्ता से जुड़े लोगों को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था भी कमजोर होती जा रही है. उन्होंने सरकार पर जनहित की बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.
अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने पश्चिमी सिंहभूम जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के फंड में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की.
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई, जे.बी. तुबिद, मंगल गिलुवा, अजीत सिंह सहित भाजपा के कई नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.
बाबूलाल मरांडी को एक स्मरण पत्र सौंपा गया
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी हो समाज युवा महासभा की केंद्रीय समिति ने राष्ट्रीय संगठन सचिव गोपी लागुरी के नेतृत्व में बाबूलाल मरांडी को एक स्मरण पत्र सौंपा. इसमें केंद्र सरकार से हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और आदिवासियों के लिए अलग सरना धर्म कोड लागू करने की मांग की गई.
गोपी लागुरी ने कहा कि इन दोनों मांगों को कई बार लोकसभा और राज्यसभा के माध्यम से केंद्र सरकार के सामने रखा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी, ताकि हो समाज की भाषा और धार्मिक पहचान को संवैधानिक मान्यता मिल सके.
रिपोर्ट – संतोष वर्मा
