Jharkhand

झारखंड में पशुपालन को बढ़ावा! बकरी, मुर्गी और बत्तख पालन के लिए सरकार की बड़ी योजना, जानें किसे मिलेगा लाभ

Rashmi Prasad
Rashmi Prasad
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टीनपी डेस्क (TNP DESK):  झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को बढ़ावा देने और इससे जुड़े परिवारों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत नई कवायद शुरू की है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के पशुपालन निदेशालय ने विभिन्न पशुधन और कुक्कुट योजनाओं के संचालन के लिए एजेंसियों, गैर सरकारी संस्थाओं (NGO) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) से आवेदन मांगे हैं. योजना के तहत बकरा-बकरी, भेड़, सुअर, मुर्गी और बत्तख पालन को बढ़ावा दिया जाएगा.

बकरा और भेड़ पालन के लिए 42 हजार रुपये प्रति यूनिट

बकरा विकास योजना के तहत ब्लैक बंगाल नस्ल के दो नर और आठ मादा समेत कुल 10 बकरा-बकरी की एक यूनिट तैयार की जाएगी. इसके लिए प्रति यूनिट अनुमानित लागत 42 हजार रुपये निर्धारित की गई है. राज्य में ऐसी 12,516 यूनिट का लक्ष्य रखा गया है.

भेड़ पालन योजना में छोटानागपुरी और शाहवादी नस्ल को शामिल किया गया है. इसमें भी दो नर और आठ मादा समेत 10 पशुओं की यूनिट होगी. इसकी अनुमानित लागत 42 हजार रुपये प्रति यूनिट है, जबकि कुल 2,257 यूनिट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

मुर्गी पालन में 5,407 ब्रायलर यूनिट का लक्ष्य

बैकयार्ड लेयर कुक्कुट योजना के तहत 420 चूजों की एक यूनिट होगी. इसमें पांच प्रतिशत संभावित मृत्यु दर को भी ध्यान में रखा गया है. प्रति यूनिट 14,700 रुपये का बजट निर्धारित है और राज्यभर में 2,984 यूनिट का लक्ष्य रखा गया है.

वहीं, ब्रायलर कुक्कुट पालन योजना के तहत एक यूनिट में 525 ब्रायलर चूजे होंगे. प्रति यूनिट अनुमानित खर्च 15,750 रुपये रखा गया है. इसके तहत 5,407 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य है.

बत्तख चूजा वितरण का सबसे बड़ा लक्ष्य

बत्तख चूजा वितरण योजना में 15 दिन के 30 लो-इनपुट बत्तख चूजों की एक यूनिट बनाई गई है. इसकी लागत 3,060 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है. योजना के तहत कुल 21,482 यूनिट का लक्ष्य रखा गया है, जो सूचीबद्ध योजनाओं में सबसे अधिक है.

पशुओं को पहले क्वारंटाइन, फिर टीकाकरण

लाभुकों तक पहुंचाए जाने वाले पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य को लेकर भी नियम तय किए गए हैं. बकरा-बकरी, भेड़ और सुअर को आपूर्ति से पहले 15 दिनों तक क्वारंटाइन में रखना होगा. इसके बाद निर्धारित बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण कराया जाएगा. पशुओं की आपूर्ति डॉक्टर से स्वास्थ्य प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही की जा सकेगी.

आपूर्ति से पहले या रास्ते में किसी पशु-पक्षी की मौत होने पर उसकी जिम्मेदारी सप्लायर की होगी और उसे दूसरा पशु-पक्षी उपलब्ध कराना होगा.

एक सप्लायर को अधिकतम चार जिले

योजना के तहत एक सप्लायर को अधिकतम चार जिलों की जिम्मेदारी दी जाएगी. इसके साथ ही प्रत्येक सप्लायर के लिए बत्तख चूजा वितरण योजना लेना अनिवार्य किया गया है. सप्लायर को चयनित लाभुक के घर की दीवार पर योजना का विवरण और लाभुक का नाम भी निर्धारित बजट के भीतर अंकित कराना होगा.

सरकार की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन गतिविधियों का विस्तार कर स्वरोजगार और आय के नए अवसर तैयार करना है.