बोकारो (BOKARO): वर्ष 2020 से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता बोकारो की 14 वर्षीय नाबालिग को तलाशने की जिम्मेदारी अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में होगी. करीब छह साल से लंबित इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए जांच CBI को सौंप दी है. कोर्ट ने मामले में सामने आए अंतरराज्यीय कनेक्शन, डिजिटल ट्रेल और आधुनिक तकनीकी जांच की जरूरत को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी से पड़ताल कराने का फैसला लिया है.
मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है. जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर 2020 को 14 साल की नाबालिग ट्यूशन पढ़ने के लिए अपने घर से निकली थी. इसके बाद वह वापस नहीं लौटी. काफी तलाश के बावजूद जब बच्ची का कोई पता नहीं चला तो उसी दिन पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. शुरुआती दौर में बोकारो पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद बच्ची के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी.
समय बीतने के साथ मामला और पेचीदा होता गया. पुलिस जांच में कुछ ऐसे सुराग सामने आए, जिनके दूसरे राज्यों से जुड़े होने की आशंका थी. साथ ही मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भी भूमिका सामने आई. इसके बाद 20 अप्रैल 2026 को केस की जांच झारखंड CID को सौंप दी गई. CID ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया और नाबालिग की तलाश शुरू की. SIT ने उपलब्ध सुरागों और तकनीकी पहलुओं को खंगाला, लेकिन बच्ची का पता लगाने में निर्णायक सफलता नहीं मिल सकी.
इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाई कोर्ट ने जांच की प्रगति और अब तक सामने आए तथ्यों पर विचार किया. कोर्ट ने माना कि मामले में अंतरराज्यीय सुराग और डिजिटल ट्रेल होने के कारण विस्तृत तकनीकी जांच की जरूरत है. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अब पूरी जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट ने CID के एडीजी को निर्देश दिया है कि मामले से संबंधित सभी दस्तावेज और जांच रिकॉर्ड CBI के रांची स्थित ईस्टर्न जोन के संयुक्त निदेशक को सौंपे जाएं. इसके साथ ही CBI निदेशक को जांच की उचित निगरानी करने और समय-समय पर इसकी समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है.
अदालत ने CBI को जांच की प्रगति को लेकर भी समयसीमा तय की है. केंद्रीय एजेंसी को 27 अक्टूबर तक मामले की प्रोग्रेस रिपोर्ट हलफनामे के माध्यम से हाई कोर्ट में दाखिल करनी होगी. ऐसे में अब CBI पुराने मामलों, संदिग्ध गतिविधियों, अंतरराज्यीय सुरागों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की नए सिरे से जांच करेगी. करीब छह साल से अपनी बेटी की तलाश कर रहे परिवार के लिए हाई कोर्ट का यह आदेश बड़ी उम्मीद लेकर आया है. अब देखना होगा कि CBI की नई जांच में कौन से सुराग सामने आते हैं और क्या लंबे समय से रहस्य बनी नाबालिग की गुमशुदगी की गुत्थी सुलझ पाती है.
