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ये स्कूल है की तबेला? टीचर ने बच्चों से कटवाया बकरे का चारा, वीडियो वायरल होते ही नप गई महोदया

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): सरकार की ओर से सरकारी स्कूल खोले गए हैं ताकि जो बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जिनके माता-पिता उन्हें प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा सकते, उन्हें अच्छी शिक्षा मिल सके. इसी उद्देश्य से सरकारी स्कूलों का संचालन किया जाता है, जहां शिक्षक और हेडमास्टर भी मौजूद होते है लेकिन समय-समय पर सरकारी स्कूल सवालों के घेरे में आ जाते हैं, क्योंकि कुछ शिक्षकों की कार्यशैली ऐसी होती है कि सवाल उठना लाजमी हो जाता है.अब तक आपने बिहार के अलग-अलग स्कूलों में बच्चों से शौचालय साफ करवाते हुए, शिक्षकों से पैर की मालीस करते हुए और यहां तक कि शिक्षकों के लिए बेंच पर किचड में बेंच बिछाते हुए भी देखा होगा, ताकि उनके पैर गंदे न हों. लेकिन आज हम आपको जो वीडियो दिखाने वाले हैं, वह आपके होश उड़ा देगा.इसमें एक टीचर ने सारी हदें पार करते हुए स्कूल को ही तबेला बना दिया.

क्या है पूरा मामला 

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने सरकारी शिक्षकों की करतूत को सामने ला दिया है. यह शर्मनाक मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का है. एक तरफ जहां यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य को आगे बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, ताकि बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिले और गरीबों को रोजगार मिल सके, वहीं यहां एक सरकारी शिक्षिका बच्चों को पढ़ाने की बजाय स्कूल को ही तबेला बना रही थी.इतना ही नहीं, बच्चों से बकरे के लिए चारा भी कटवाया जा रहा था. आइए आपको पूरा मामला बताते है.प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका पर स्कूल परिसर को तबेला बनाने और मासूम छात्रों से मजदूरों जैसा काम कराने का आरोप लगा है.जब इसका वीडियो वायरल हुआ, तो बीएसए सचिन कसाना ने जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद ऐसे शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, जो स्कूल में पढ़ाई की जगह इस तरह की हरकतें करते है.

कहां का है पूरा मामला 

बताया जा रहा है कि पूरा मामला बिजनौर अंतर्गत आने वाले प्राथमिक विद्यालय भिक्कावाला का है, जहां की शिक्षिका कसीमा खातून पर गंभीर आरोप लगे है.दरअसल, वायरल वीडियो 28 मई 2026 का बताया जा रहा है.आरोप है कि बकरीद पर कुर्बानी के लिए खरीदे गए बकरे को वह करीब एक महीने पहले से अपने साथ स्कूल लाती थीं और उसे स्कूल परिसर में बांध देती थी. बच्चों का आरोप है कि उन्हें पढ़ाने की बजाय जंगल भेजा जाता था, ताकि वे बकरे के लिए चारा और पत्तियां काटकर ला सके.जब अभिभावकों को इस बात की जानकारी हुई, तब मामला उजागर हुआ

सरकारी राशि गबन का भी है आरोप

बताया जा रहा है कि कसीमा खातून पर केवल बच्चों से चारा कटवाने का ही आरोप नहीं है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी आरोप लगा है. शिकायत के मुताबिक, स्कूल की चारदीवारी निर्माण के लिए 4.40 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी, जिसका गबन करने का आरोप भी शिक्षिका पर लगा है.जब इसकी शिकायत मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में की गई, तो उनके निर्देश पर एक जांच समिति गठित की गई.जांच में शिक्षिका पर स्कूल परिसर में बकरा बांधने, बच्चों से चारा कटवाने और वित्तीय अनियमितता के आरोप सही पाए गए.इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कसाना ने निलंबन पत्र जारी करते हुए कहा कि शिक्षिका ने विद्यालय परिसर में घोर अनुशासनहीनता बरती है और अपने पद का दुरुपयोग किया है, जिससे शिक्षा विभाग की छवि धूमिल हुई है. 

निलंबन अवधि के दौरान वित्तीय नियमों के तहत कसीमा खातून को आधे वेतन के बराबर जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा.हालांकि, यह भत्ता उन्हें तभी मिलेगा, जब वह यह प्रमाणित करेंगी कि निलंबन अवधि के दौरान वह किसी अन्य व्यापार या नौकरी में शामिल नहीं है.