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क्या दोहराएगा इतिहास? अन्ना आंदोलन जैसी राह पर CJP प्रोटेस्ट, 20 जुलाई को होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन

Saumya Shukla
Senior News Publisher • TheNewsPost.in
क्या दोहराएगा इतिहास? अन्ना आंदोलन जैसी राह पर CJP प्रोटेस्ट, 20 जुलाई को होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन

टीएनपी डेस्क(tNP DESK): दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा CJP प्रोटेस्ट अब धीरे-धीरे एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है. शुरुआत में यह प्रदर्शन सीमित लोगों की मांगों तक नजर आ रहा था, लेकिन अब इसमें छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई चर्चित चेहरों के जुड़ने से इसकी आवाज लगातार तेज होती जा रही है. आंदोलन को सबसे ज्यादा चर्चा तब मिली जब पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने अनशन शुरू किया.

देश में बड़े आंदोलनों का इतिहास रहा है, जब जनता की आवाज ने सरकारों को फैसले लेने पर मजबूर किया है. ऐसा ही एक बड़ा उदाहरण साल 2011 का अन्ना आंदोलन था. लोकपाल कानून की मांग को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर-मंतर और बाद में रामलीला मैदान में आंदोलन किया था. इस आंदोलन को देशभर से भारी जनसमर्थन मिला था. लगातार बढ़ते दबाव के बाद तत्कालीन सरकार को आंदोलनकारियों के साथ बातचीत करनी पड़ी और उनकी मांगों पर आगे बढ़ने का भरोसा देना पड़ा.

अन्ना आंदोलन के दौरान सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता काफी जल्दी खुल गया था. अन्ना हजारे ने अप्रैल 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की थी और करीब 12 दिनों के भीतर सरकार को बातचीत के लिए आगे आना पड़ा था. बढ़ते जनदबाव के बाद सरकार ने संयुक्त मसौदा समिति बनाने और लोकपाल कानून को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया था.

वहीं, CJP प्रोटेस्ट को लेकर प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनका आंदोलन कई दिनों से जारी है और सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बाद भी सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है. उनका आरोप है कि सरकार बातचीत के लिए आगे नहीं आ रही है और उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है.

CJP प्रोटेस्ट को सोनम वांगचुक के समर्थन से नई ऊर्जा मिली है. सोनम वांगचुक शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी अलग पहचान रखते हैं. उनके अनशन में शामिल होने के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली और कई सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग भी इससे जुड़ने लगे.

इस आंदोलन को कई प्रमुख लोगों का समर्थन भी मिल रहा है. अभिनेता प्रकाश राज ने जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई. इसके अलावा कई सामाजिक कार्यकर्ता और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इस आंदोलन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है और बातचीत के लिए पहल नहीं कर रही है. उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है. प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि जब अन्ना आंदोलन के दौरान सरकार ने जल्दी बातचीत शुरू की थी, तो CJP प्रोटेस्ट के मामले में भी सरकार को संवाद का रास्ता खोलना चाहिए.

अब CJP ने अपने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है. प्रदर्शनकारियों की ओर से 20 जुलाई को "संसद चलो अभियान" की घोषणा की गई है. इस अभियान के जरिए आंदोलनकारी संसद तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश करेंगे और सरकार से अपनी मांगों पर जवाब की मांग करेंगे.

किसी भी आंदोलन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता कितना खुलता है. अन्ना आंदोलन में जहां कुछ ही दिनों में बातचीत शुरू हो गई थी, वहीं CJP प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारी अभी भी सरकार से संवाद की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

अब देखने वाली बात होगी कि 20 जुलाई का संसद चलो अभियान किस रूप में सामने आता है और क्या सरकार इस बढ़ते आंदोलन के बीच प्रदर्शनकारियों से बातचीत का रास्ता अपनाती है या नहीं. फिलहाल सोनम वांगचुक के अनशन, बढ़ते समर्थन और संसद चलो अभियान के ऐलान ने CJP प्रोटेस्ट को देश की राजनीति और समाज में चर्चा का बड़ा मुद्दा बना दिया है.