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15 अगस्त को ही क्यों मिली भारत को आजादी? क्या 14 या 16 अगस्त भी हो सकता था? जानिए पूरी कहानी

Rashmi Prasad  CE
Rashmi Prasad CE
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टीनपी डेस्क (TNP DESK): भारत हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आजादी के लिए आखिर 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई? क्या भारत को 14 या 16 अगस्त को भी स्वतंत्रता मिल सकती थी? दरअसल, 15 अगस्त 1947 की तारीख अचानक तय नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे ब्रिटिश सरकार के फैसले, राजनीतिक परिस्थितियां और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की भूमिका जुड़ी हुई थी. भारत की आजादी का समय जितना ऐतिहासिक है, उतना ही दिलचस्प इसकी तारीख तय होने का इतिहास भी है.

1947 से पहले ही तय हो गई थी आजादी की तारीख

भारत को आजादी देने की प्रक्रिया में सबसे बड़ा मोड़ 20 फरवरी 1947 को आया. ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार जून 1948 तक भारत में सत्ता का परिवर्तन कर देगी. इसके बाद लॉर्ड माउंटबेटन को भारत का अंतिम वायसराय बनाकर भेजा गया. उन्होंने भारतीय नेताओं के साथ बातचीत शुरू की और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को तय समय से पहले पूरा करने का फैसला लिया.

माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को भारत के विभाजन और सत्ता परिवर्तन की योजना सार्वजनिक की. शुरुआत में ब्रिटिश सरकार की ओर से सत्ता हस्तांतरण की समय सीमा जून 1948 रखी गई थी, लेकिन परिस्थितियां तेजी से बदल रही थीं. विभाजन को लेकर तनाव और हिंसा के बीच माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण जल्द करने का निर्णय लिया.

15 अगस्त की तारीख क्यों चुनी गई?

15 अगस्त 1947 की तारीख चुनने के पीछे लॉर्ड माउंटबेटन की व्यक्तिगत पसंद भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. दरअसल, 15 अगस्त 1945 को जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था. उस समय माउंटबेटन दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्र सेनाओं के कमांडर थे. जापान के आत्मसमर्पण को द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्रों की बड़ी जीत माना गया था.

माउंटबेटन के लिए 15 अगस्त इसलिए खास तारीख थी. उन्होंने सत्ता हस्तांतरण के लिए इसी दिन को चुना. हालांकि, भारत में आजादी का ऐलान और सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया उससे जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ हुई. 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि को संविधान सभा की ऐतिहासिक बैठक हुई, जिसमें भारत के स्वतंत्र राष्ट्र बनने की घोषणा की गई.

फिर 14 अगस्त को क्यों मनाता है पाकिस्तान?

भारत और पाकिस्तान का विभाजन एक ही सत्ता परिवर्तन प्रक्रिया का हिस्सा था. पाकिस्तान के लिए 14 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस माना गया, जबकि भारत ने 15 अगस्त को आजादी का दिन अपनाया. इसका एक कारण यह भी था कि सत्ता हस्तांतरण से जुड़े कार्यक्रमों का समय और स्थान अलग-अलग थे. पाकिस्तान में स्वतंत्रता समारोह 14 अगस्त को आयोजित किया गया, जबकि भारत में 15 अगस्त को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से तिरंगा फहराया और देश को संबोधित किया. इस तरह दो नए राष्ट्र अस्तित्व में आए और ब्रिटिश शासन का अंत हुआ.

क्या 14 या 16 अगस्त को आजादी मिल सकती थी?

सैद्धांतिक रूप से तारीख बदली जा सकती थी, क्योंकि सत्ता हस्तांतरण की तारीख तय करने का अधिकार ब्रिटिश सरकार और वायसराय के पास था. शुरुआत में तो जून 1948 तक सत्ता परिवर्तन की बात कही गई थी. लेकिन एक बार माउंटबेटन ने 15 अगस्त 1947 तय कर दी, तो उसी तारीख को लेकर पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. इसलिए 14 या 16 अगस्त की संभावना पूरी तरह असंभव नहीं थी, लेकिन ऐतिहासिक परिस्थितियों और माउंटबेटन के फैसले ने 15 अगस्त को भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तारीखों में शामिल कर दिया.

15 अगस्त सिर्फ एक तारीख नहीं, आजादी की पहचान है

15 अगस्त 1947 को भारत ने करीब दो सदियों के ब्रिटिश शासन से मुक्ति पाई. यह दिन केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक नहीं था, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लंबे संघर्ष, बलिदान और स्वतंत्रता की आकांक्षा का परिणाम था. महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू और अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष ने आजादी की राह तैयार की. इसलिए 15 अगस्त का महत्व केवल इस बात में नहीं है कि इसी दिन भारत स्वतंत्र हुआ, बल्कि यह दिन उस लंबे संघर्ष की याद भी दिलाता है, जिसने भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाया.