टीएनपी डेस्क(TNP DESK): भारत को विकसित देश बनाने की चर्चा आज तेजी से हो रही है. सरकार ने 2047 तक भारत को "विकसित भारत" बनाने का लक्ष्य रखा है. लेकिन देश में विकास की योजना बनाने की परंपरा नई नहीं है. आजादी के कुछ साल बाद ही भारत ने Five Year Plan यानी पंचवर्षीय योजना की शुरुआत कर दी थी. इन योजनाओं के जरिए सरकार पांच साल के लिए खेती, उद्योग, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के लक्ष्य तय करती थी.
हालांकि, एक जरूरी बात यह है कि भारत में अब पुरानी व्यवस्था वाले Five Year Plans नहीं बनते. आखिरी यानी 12वीं पंचवर्षीय योजना 2012 से 2017 तक चली थी. इसके बाद Planning Commission की जगह NITI Aayog ने ले ली और विकास की रणनीति का तरीका बदल गया.
भारत में Five Year Plan कब शुरू हुआ?
भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू हुई थी और यह 1956 तक चली. उस समय देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे और Planning Commission के जरिए इस योजना को लागू किया गया था.
Planning Commission की स्थापना 1950 में हुई थी. आजादी और विभाजन के बाद देश के सामने खाद्यान्न की कमी, गरीबी, बेरोजगारी और कमजोर बुनियादी ढांचा जैसी बड़ी चुनौतियां थीं. इसलिए सरकार ने अगले पांच साल के लिए प्राथमिकताएं तय करके योजनाबद्ध तरीके से पैसा खर्च करने का फैसला किया.
पहली योजना में सबसे ज्यादा ध्यान खेती, सिंचाई, खाद्य सुरक्षा, रोजगार और ग्रामीण विकास पर दिया गया. इसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और भविष्य के विकास के लिए मजबूत आधार तैयार करना था.
Five Year Plan का मतलब क्या था?
पंचवर्षीय योजना का सीधा मतलब था कि सरकार पांच साल के लिए देश के विकास का रोडमैप तैयार करती थी. इसमें यह तय होता था कि किस क्षेत्र में कितना निवेश करना है और अगले पांच साल में क्या हासिल करना है.
जैसे किसी योजना में कृषि उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया तो किसी में स्टील प्लांट, बिजली और भारी उद्योग विकसित करने पर. बाद के वर्षों में गरीबी हटाने, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, गांवों के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को ज्यादा महत्व दिया गया.
अब तक कितने Five Year Plans हुए?
भारत में कुल 12 आधिकारिक Five Year Plans लागू हुए.
पहली योजना 1951-56 और दूसरी योजना 1956-61 तक चली. दूसरी योजना में भारी उद्योग और औद्योगीकरण पर ज्यादा जोर दिया गया था.
तीसरी योजना 1961-66 के बाद युद्ध, सूखा और आर्थिक समस्याओं की वजह से 1966 से 1969 के बीच तीन Annual Plans चलाए गए. इसे आम तौर पर "Plan Holiday" कहा जाता है.
इसके बाद चौथी योजना 1969-74, पांचवीं 1974-79, छठी 1980-85, सातवीं 1985-90, आठवीं 1992-97, नौवीं 1997-2002, दसवीं 2002-07 और ग्यारहवीं 2007-12 तक चली.
1990 से 1992 के बीच राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के कारण दो Annual Plans लागू किए गए थे.
12वीं और आखिरी पंचवर्षीय योजना 2012 से 2017 तक चली. इसका मुख्य विचार तेज, ज्यादा समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास था.
Five Year Plan क्यों बंद कर दिया गया?
2014 के बाद केंद्र सरकार ने पुरानी Planning Commission व्यवस्था को बदलने का फैसला किया. जनवरी 2015 में NITI Aayog अस्तित्व में आया.
नई व्यवस्था में सरकार ने यह माना कि राज्यों की जरूरतें अलग-अलग हैं और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था में पांच साल की कठोर योजना हमेशा पर्याप्त नहीं होती.
इसलिए केंद्र से राज्यों को केवल लक्ष्य देने के बजाय राज्यों की भागीदारी, नीति निर्माण, डेटा और लंबे समय की रणनीति पर ज्यादा जोर दिया गया.
2017 के बाद कोई 13वां Five Year Plan लागू नहीं किया गया.
अब सरकार का लक्ष्य क्या है?
आज सरकार का सबसे बड़ा दीर्घकालिक लक्ष्य Viksit Bharat 2047 है. इसका मकसद आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को विकसित देश बनाना है.
NITI Aayog के दस्तावेजों के मुताबिक इस विजन में तेज आर्थिक विकास, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, महिला भागीदारी, टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, पर्यावरण और सभी वर्गों को विकास में शामिल करने पर जोर है.
सरकारी नीति दस्तावेजों में 2047 तक करीब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा का भी जिक्र किया गया है. साथ ही प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने और जीवन स्तर को विकसित देशों के करीब पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
विकसित भारत बनने के लिए किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?
भारत को विकसित देश बनाने के लिए केवल GDP बढ़ाना काफी नहीं होगा. इसके लिए रोजगार के अच्छे अवसर, बेहतर स्कूल और अस्पताल, आधुनिक शहर, मजबूत गांव और विश्वस्तरीय सड़क, रेल, एयरपोर्ट और डिजिटल नेटवर्क जरूरी होंगे.
सरकार मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने, युवाओं को स्किल देने, महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी बढ़ाने और नई टेक्नोलॉजी को अपनाने पर भी जोर दे रही है. NITI Aayog ने विकसित भारत की राह में स्किलिंग, मैन्युफैक्चरिंग और ज्यादा लोगों की आर्थिक भागीदारी को अहम बताया है.
इसके अलावा Make in India, Digital India, Startup India, आत्मनिर्भर भारत और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी इसी बड़े लक्ष्य से जुड़े हुए हैं.
यानी Five Year Plan खत्म, लेकिन प्लानिंग नहीं
भारत में पारंपरिक पंचवर्षीय योजनाओं का दौर 2017 में खत्म हो चुका है. इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार ने लंबे समय की प्लानिंग बंद कर दी है.
फर्क सिर्फ इतना है कि पहले देश का विकास मुख्य रूप से पांच-पांच साल की योजनाओं में बांटा जाता था. अब सरकार छोटे, मध्यम और लंबे समय के लक्ष्यों के साथ अलग-अलग मिशन और नीतियों पर काम करती है.
इस समय सबसे बड़ा लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत बनाना है. यानी पहली पंचवर्षीय योजना ने जिस योजनाबद्ध विकास की शुरुआत 1951 में की थी, उसी सोच का आधुनिक रूप अब Viksit Bharat 2047 के रूप में सामने है.