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5 अगस्त 2019 जम्मू-कश्मीर के लिए क्या लाया था? 7 साल में कितना बदला कश्मीर

Samiksha Singh
Samiksha Singh
Sr. Content Writer

टीएनपी डेस्क: जम्मू और कश्मीर के लिए 5 अगस्त की तारीख़ काफी महत्वपूर्ण रही है.यहाँ के समग्र पहलुओं को यह प्रभावित किया है.

पुनर्गठन के बाद विकास, पर्यटन, कनेक्टिविटी और खेल में दिखी नई तस्वीर

 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव हुआ. अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को हटाने के साथ तत्कालीन राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित किया गया. इस फैसले के बाद से जम्मू-कश्मीर में विकास, पर्यटन, कनेक्टिविटी, निवेश और खेल जैसे क्षेत्रों में हुए बदलाव लगातार चर्चा में रहे हैं.

सात साल के इस दौर को केवल राजनीतिक बदलाव के नजरिए से देखना उचित नहीं होगा. जमीन पर सड़क और रेल कनेक्टिविटी से लेकर पर्यटन, खेल सुविधाओं और स्थानीय युवाओं की भागीदारी तक कई क्षेत्रों में बदलाव की तस्वीर सामने आई है. हालांकि रोजगार, निवेश, राज्य का दर्जा और राजनीतिक अधिकार जैसे मुद्दे अब भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं.

प्रदेश में पर्यटन ने पकड़ी रफ्तार, घाटी में लौटी रौनक

कश्मीर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. श्रीनगर की डल झील, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और जम्मू के धार्मिक पर्यटन स्थलों पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय गतिविधि देखी गई है.

पर्यटन बढ़ने का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. होटल, होम-स्टे, टैक्सी, शिकारा, रेस्तरां, ट्रैवल एजेंसी, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों के लिए पर्यटकों की आवाजाही कमाई का बड़ा स्रोत है.

कश्मीर की खूबसूरत वादियां अब केवल गर्मियों में ही नहीं, बल्कि अलग-अलग मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं. सर्दियों में गुलमर्ग और अन्य इलाकों में विंटर टूरिज्म भी महत्वपूर्ण बन रहा है.

सड़क से रेल तक कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव

पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया गया है. सड़क परियोजनाओं, सुरंगों, पुलों और रेल नेटवर्क के विस्तार ने पहाड़ी इलाकों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई है.

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई महत्वपूर्ण सुरंगों और परियोजनाओं ने यात्रा को आसान बनाने में मदद की है. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में ऑल-वेदर कनेक्टिविटी का विस्तार स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटन और व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है.

रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है. इस परियोजना ने कश्मीर घाटी को देश के रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक महत्व हासिल किया है.इससे यात्रा के समय में कमी, व्यापार में सुविधा और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

चिनाब रेल ब्रिज बना इंजीनियरिंग की मिसाल

यह बढ़ता भारत है. जम्मू-कश्मीर की कनेक्टिविटी की चर्चा चिनाब रेल ब्रिज के बिना अधूरी है. दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुलों में शामिल यह पुल जम्मू-कश्मीर के दुर्गम इलाकों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है.

इसके साथ ही सड़क और रेल सुरंगों का निर्माण भी पहाड़ी क्षेत्रों में सालभर संपर्क बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है.

खेल के मैदान में नई पीढ़ी का जोश

जम्मू-कश्मीर में बदलाव की एक दिलचस्प तस्वीर खेल के मैदानों में भी दिखाई देती है. क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, तीरंदाजी, विंटर स्पोर्ट्स, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़ी है.

कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियां विंटर स्पोर्ट्स के लिए विशेष अवसर देती हैं। गुलमर्ग लंबे समय से स्कीइंग और स्नो स्पोर्ट्स के लिए जाना जाता है.इसके अलावा स्थानीय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण गतिविधियों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के मंच उपलब्ध कराए हैं.

जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. कई युवा अब खेल को सिर्फ शौक नहीं, बल्कि करियर के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं.

गांवों तक पहुंचता खेल का मैदान

खेल क्षेत्र में सिर्फ बड़े शहरों पर ध्यान देने के बजाय ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में खेल सुविधाएं विकसित करने की कोशिश भी महत्वपूर्ण है. स्थानीय स्तर पर मैदान, इंडोर स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और प्रतियोगिताओं के आयोजन से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है.

खेल को बढ़ावा देने का एक दूसरा पहलू यह भी है कि इससे युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने और उनकी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देने में मदद मिलती है.

डिजिटल कनेक्टिविटी और नई अर्थव्यवस्था

जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का विस्तार भी प्रशासन और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहा है. ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान और ई-कॉमर्स ने आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं.

कश्मीर के पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं.

विकास के साथ रोजगार सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि विकास और कनेक्टिविटी की तस्वीर में सकारात्मक बदलाव दिखाई देता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के सामने कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां अब भी हैं. युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार, निजी निवेश, औद्योगिक विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना आने वाले वर्षों की बड़ी प्राथमिकताएं हैं.

पर्यटन और सरकारी नौकरियों के अलावा निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाना जरूरी होगा, ताकि बड़ी संख्या में युवा अपनी प्रतिभा और शिक्षा का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर कर सकें.

राजनीतिक सवाल भी अभी कायम

पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला. इसके बाद राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों के बीच राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है.

इसलिए जम्मू-कश्मीर की सात साल की कहानी केवल विकास की कहानी नहीं है. यह राजनीतिक बदलाव, सुरक्षा, विकास, पर्यटन, कनेक्टिविटी और स्थानीय आकांक्षाओं—सभी को साथ लेकर चलने वाली कहानी है.

सात साल बाद जम्मू-कश्मीर की तस्वीर क्या कहती है?

अगर 2019 के बाद के वर्षों को व्यापक नजरिए से देखा जाए तो जम्मू-कश्मीर में सड़क और रेल कनेक्टिविटी, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और खेल गतिविधियों में बदलाव की कोशिश स्पष्ट दिखाई देती है.

पर्यटन ने स्थानीय कारोबार को गति दी है, बेहतर कनेक्टिविटी ने दूरदराज इलाकों को जोड़ने में मदद की है और खेल के मैदानों में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है.

लेकिन असली सफलता का पैमाना आने वाले वर्षों में यह होगा कि ये बदलाव स्थायी रोजगार, बेहतर आय, निजी निवेश, शिक्षा, खेल और स्थानीय स्तर पर अवसरों में कितना बदलते हैं.