टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने अपने अतरंगे और सख्त कानूनों की एक और नया फरमान जोड़ दिया है. इस बार तालिबान के निशाने पर आधुनिक दुनिया की सबसे जरूरी चीज, यानी 'स्मार्टफोन' आया है. तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबातुल्लाह अखुंदजादा द्वारा जारी इस नए मौखिक आदेश के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया है. इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर सूचनाओं के स्वतंत्र प्रवाह को पूरी तरह से रोकना और अपने लड़ाकों व आम जनता पर कड़ा नियंत्रण बनाए रखना है. यह आदेश केवल आम नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि खुद तालिबान के सदस्यों और सरकारी कर्मचारियों पर भी सख्ती से लागू किया जा रहा है.
स्मार्टफोन बैन और कड़े दंड का प्रावधान
तालिबान प्रमुख हिबातुल्लाह अखुंदजादा ने जून 2026 की शुरुआत में एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने का मौखिक निर्देश दिया था, जिसका जमीनी असर अब साफ दिखने लगा है.
इस प्रतिबंध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. शुरुआती दौर में इसे सरकारी कर्मचारियों, तालिबान लड़ाकों और स्कूलों तक सीमित किया गया था, लेकिन अब यह पाबंदी स्वास्थ्य केंद्रों, सार्वजनिक दफ्तरों और विश्वविद्यालयों तक फैल चुकी है. पांजशीर के शिक्षा विभाग ने स्कूलों में स्मार्टफोन को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है, जबकि घोर, कंधार और मैदान वर्धक जैसे प्रांतों में स्वास्थ्य केंद्रों के भीतर भी इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है.
इंटरनेट और मीडिया पर डिजिटल इमरजेंसी
स्मार्टफोन बैन के साथ-साथ तालिबान ने डिजिटल दुनिया पर भी पूरी तरह से शिकंजा कस दिया है. देश के कई महत्वपूर्ण प्रांतों में फाइबर ऑप्टिक इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. तालिबान का तर्क है कि इंटरनेट के माध्यम से 'अनैतिक गतिविधियां' फैल रही हैं, जिन्हें रोकना उनके शासन के लिए जरूरी है. इसके अलावा, टेलीविजन चैनलों और मीडिया पर भी अजीबोगरीब नियम थोपे गए हैं; अब टीवी पर किसी भी जीवित प्राणी (इंसान या जानवर) की तस्वीरें और वीडियो दिखाने पर पाबंदी है. शिक्षा के क्षेत्र में भी सेंसरशिप इस कदर बढ़ चुकी है कि महिलाओं द्वारा लिखी गई सभी किताबों को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों से पूरी तरह हटा दिया गया है.
महिलाओं के अधिकारों का पूरी तरह हनन
साल 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता संभालते ही तालिबान ने सबसे पहला और बड़ा प्रहार महिलाओं के अधिकारों पर किया था. देश में लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा (कक्षा 6 के बाद) और उच्च शिक्षा पर पूरी तरह से रोक है. महिलाएं न तो विश्वविद्यालयों में पढ़ सकती हैं और न ही वहां पढ़ा सकती हैं. इसके अलावा, महिलाओं को बिना किसी 'महरम' (पुरुष अभिभावक) के लंबी यात्रा करने की अनुमति नहीं है.
संस्कृति, खेल और मनोरंजन पर ताला
तालिबान ने देश की सांस्कृतिक और सामाजिक स्वतंत्रता को भी पूरी तरह से कुचल दिया है. अफगानिस्तान में शतरंज खेलने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है, क्योंकि तालिबान इसे जुए का एक रूप मानता है. इसके साथ ही देश में हर तरह के संगीत, नाटक, लाइव परफॉर्मेंस और रोमांटिक कविताओं पर रोक है. कला और अभिव्यक्ति की आजादी को खत्म करते हुए अखबारों, किताबों, विज्ञापनों और यहाँ तक कि घरों की दीवारों पर भी महिलाओं की तस्वीरें या पेंटिंग्स लगाने पर सख्त पाबंदी लागू कर दी गई है. इन लगातार बढ़ते प्रतिबंधों ने अफगानिस्तान को आधुनिक दुनिया से पूरी तरह काट दिया है.
