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27 जून तक जवाब दो, वरना भूख हड़ताल...NEET मुद्दे पर सरकार को सोनम वांगचुक की चेतावनी

Saumya Shukla
Senior News Publisher • TheNewsPost.in
27 जून तक जवाब दो, वरना भूख हड़ताल...NEET मुद्दे पर सरकार को सोनम वांगचुक की चेतावनी

टीएनपी(TNP): देश में NEET परीक्षा को लेकर मचा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. अब इस मुद्दे पर सोनम वांगचुक भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर 27 जून तक सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब या कार्रवाई नहीं होती है, तो वह 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे. वांगचुक का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा या पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की भी है.

 

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी एक वीडियो में कहा कि वह हाल ही में स्विट्जरलैंड के जिनेवा दौरे से लौटे हैं. वहां जाने से पहले उन्होंने अपने समर्थकों से कहा था कि वापस आने के बाद सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा करेंगे. अब उनका कहना है कि इंतजार की सीमा खत्म हो रही है और सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा.

वांगचुक ने कहा कि सरकार के सामने उनकी सबसे बड़ी मांग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है. उनका कहना है कि छात्रों से जुड़े फैसलों में उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. अगर परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि अगर 27 जून तक सरकार की तरफ से जवाब नहीं मिला, तो वह 28 जून से जंतर-मंतर पर आम लोगों के साथ भूख हड़ताल पर बैठेंगे. उन्होंने अपने समर्थकों से भी इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है.

उधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला है. राहुल गांधी ने कहा कि जिन छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं या जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, उन्हें अपमानित करना पूरी तरह गलत है. उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना सरकार की जिम्मेदारी है.

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवादों ने देश के करोड़ों युवाओं का भरोसा कमजोर किया है. उनका कहना है कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय सरकार को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने यह भी मांग की कि शिक्षा मंत्री अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें.

अब सभी की नजर 27 जून पर टिकी है. अगर सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आता है, तो 28 जून से शुरू होने वाली प्रस्तावित भूख हड़ताल इस पूरे विवाद को नई दिशा दे सकती है.