टीएनपी(TNP): देश में लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. इस आंदोलन की शुरुआत कुछ छात्र संगठनों और युवाओं ने की थी, लेकिन अब यह धीरे-धीरे एक बड़े जन आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों की वजह से लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. उनका मानना है कि जब कोई परीक्षा रद्द होती है या पेपर लीक होता है, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों को होता है जिन्होंने महीनों और सालों तक मेहनत की होती है.
रविवार को आंदोलन के दूसरे दिन इस विरोध प्रदर्शन को एक बड़ा समर्थन मिला. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जल्द कार्रवाई करने की अपील की. उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल जैसे बड़े कदम पर भी विचार कर सकते हैं.
जंतर-मंतर पर जुटे युवाओं ने विरोध का तरीका भी थोड़ा अलग रखा है. आमतौर पर आंदोलनों में नारे और भाषण देखने को मिलते हैं, लेकिन यहां कई छात्र सोशल मीडिया की भाषा में अपनी बात रख रहे हैं. पोस्टर, मीम्स और इंटरनेट पर वायरल होने वाले ट्रेंड्स का इस्तेमाल करके वे परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि आज के युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने का यही सबसे प्रभावी तरीका है.
प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है. वे चाहते हैं कि पूरे देश की परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए. उनका मानना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं दोबारा होती रहेंगी.
युवाओं की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया में सुधार किया जाए. पेपर लीक रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं. साथ ही जिन मामलों में लापरवाही हुई है, उनकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और हर दिन इसमें नए लोग शामिल हो रहे हैं. छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे. आने वाले दिनों में यह आंदोलन कितना बड़ा रूप लेता है और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है.
