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बचत का स्मार्ट तरीका! एक बार निवेश कर हर महीने पाएं 5 हजार रूपए, जानें Post Office की ये खास स्कीम 

Samiksha Singh
Samiksha Singh
Sr. Content Writer

TNP DESK- अगर आप अपने पैसे को सुरक्षित जगह निवेश करने के साथ-साथ हर महीने एक तय आमदनी चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की कुछ बचत योजनाएं आपके लिए उपयोगी हो सकती हैं. खासतौर पर Post Office Monthly Income Scheme (MIS) उन निवेशकों के लिए है जो एकमुश्त रकम जमा करके नियमित मासिक आय हासिल करना चाहते हैं.

इस योजना में निवेशक एक बार पैसा जमा करता है और योजना के नियमों के मुताबिक हर महीने ब्याज के रूप में आय प्राप्त कर सकता है. यानी नौकरी या कारोबार से होने वाली आमदनी के अलावा यह नियमित कैश फ्लो का विकल्प बन सकता है.

पोस्ट ऑफिस MIS स्कीम

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (MIS) में निवेश करने वालों को सरकार की ओर से सुरक्षित निवेश के साथ आकर्षक 7.40 फीसदी सालाना ब्याज दिया जाता है. इस योजना में 18 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति खाता खुलवा सकता है. इसमें एकमुश्त राशि निवेश की जाती है और इसकी मैच्योरिटी अवधि 5 साल निर्धारित है.

 ₹5,001 हर महीने कैसे मिलेंगे?

अगर किसी निवेशक को करीब ₹5,001 प्रति महीने ब्याज के रूप में चाहिए तो इसके लिए कितनी रकम निवेश करनी होगी यह उस समय लागू ब्याज दर और खाते की शर्तों पर निर्भर करेगा. इसलिए निवेश करने से पहले पोस्ट ऑफिस की मौजूदा ब्याज दर जरूर जांच लें.

उदाहरण के तौर पर अगर किसी योजना में सालाना ब्याज दर 7.4 फीसदी हो तो ₹5,001 की मासिक आय के लिए लगभग ₹8.11 लाख  की जमा राशि की जरूरत पड़ेगी. यह सिर्फ गणना का उदाहरण है वास्तविक भुगतान योजना की मौजूदा दर, निवेश सीमा और नियमों के आधार पर होगा.

Post Office MIS में क्या है खास?

पोस्ट ऑफिस की Monthly Income Scheme में एकमुश्त रकम जमा करने के बाद हर महीने ब्याज प्राप्त किया जा सकता है. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है, जिन्हें नियमित आय की जरूरत होती है.

हालांकि निवेश करने से पहले निवेश की अधिकतम सीमा, अवधि, ब्याज दर, समय से पहले खाता बंद करने के नियम और टैक्स से जुड़े प्रावधान जरूर समझ लें.

निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान

पोस्ट ऑफिस की योजनाएं सुरक्षित निवेश के विकल्पों में गिनी जाती हैं, लेकिन किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसके मौजूदा नियमों की जानकारी लेना जरूरी है. ब्याज दरें समय-समय पर सरकार द्वारा बदली जा सकती हैं, इसलिए पुरानी दरों के आधार पर निवेश का फैसला न करें.