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आज से बदले कई अहम कानून, साइबर क्राइम बना संगठित अपराध, आतंकवाद की नई परिभाषा और देशद्रोह पर भी सख्ती

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
आज से बदले कई अहम कानून, साइबर क्राइम बना संगठित अपराध, आतंकवाद की नई परिभाषा और देशद्रोह पर भी सख्ती

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो गया है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत कई नए प्रावधान प्रभावी हो गए हैं. एक जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह नए कानून लागू किए गए थे. अब एक जुलाई 2026 से इन कानूनों के तहत कुछ और महत्वपूर्ण प्रावधान लागू कर दिए गए हैं, जिनका उद्देश्य अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और न्याय प्रक्रिया को अधिक आधुनिक एवं पारदर्शी बनाना है.

नए प्रावधानों के तहत अब बड़े पैमाने पर किए जाने वाले साइबर अपराधों को संगठित अपराध की श्रेणी में रखा गया है. ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर ठगी, डिजिटल माध्यम से फिरौती, बड़े वित्तीय घोटाले और संगठित साइबर नेटवर्क के जरिए किए जाने वाले अपराधों पर अब पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी. ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया है.

भारतीय न्याय संहिता में पहली बार आतंकवाद को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. इससे आतंकवादी गतिविधियों की कानूनी पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और प्रभावी होगी. सरकार का मानना है कि इस बदलाव से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जांच और अभियोजन को मजबूती मिलेगी.

ब्रिटिश काल से लागू राजद्रोह (Sedition) संबंधी कानून को समाप्त कर दिया गया है. उसकी जगह अब ऐसा नया प्रावधान लागू किया गया है, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को दंडित करेगा. नए कानून के तहत राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है.

भारतीय न्याय संहिता में मॉब लिंचिंग को पहली बार अलग और गंभीर अपराध के रूप में शामिल किया गया है. यदि भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति की हत्या की जाती है, तो दोषियों को आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकती है. इसके अलावा फिरौती, जमीन पर अवैध कब्जा, संगठित आपराधिक गिरोहों की गतिविधियां और बड़े स्तर पर किए जाने वाले आर्थिक अपराधों को भी संगठित अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है. इन मामलों में पहले की तुलना में अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है.

नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए भी कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं. यौन अपराध, मानव तस्करी, बाल शोषण और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कानूनों को और मजबूत बनाया गया है. न्याय प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से डिजिटल जांच प्रणाली को बढ़ावा दिया गया है. अब कई प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को प्राथमिकता मिलेगी और जांच एवं सुनवाई के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की गई है, ताकि मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी न हो.

नए कानूनों में छोटे और कम गंभीर अपराधों के लिए जेल भेजने के बजाय सामुदायिक सेवा का विकल्प भी जोड़ा गया है. ऐसे मामलों में दोषियों से सार्वजनिक स्थानों की सफाई, वृक्षारोपण या अन्य सामाजिक कार्य कराए जा सकते हैं. इसका उद्देश्य छोटे अपराध करने वालों को सुधार का अवसर देना और जेलों पर बढ़ते बोझ को कम करना है. इन नए प्रावधानों के लागू होने के साथ देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था तकनीक आधारित, अधिक जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.