☰
INDIA

जंतर-मंतर पहुंचते ही हिरासत में लिए गए आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क(TNP DESK); दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर माहौल गरमा गया है. प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत 500 से ज्यादा लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया. हिरासत में लिए गए लोगों में आप नेता आतिशी, संजीव झा, अनुराग ढांडा और संजय सिंह समेत कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं.

प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने बढ़ाई सख्ती

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी थी. जंतर-मंतर रोड पर बैरिकेडिंग की गई और ट्रैफिक को भी प्रभावित किया गया. नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए गए, जिसके तहत बिना अनुमति लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है. बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई.

पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी थी. इसके बावजूद आप और दूसरे विपक्षी दलों से जुड़े नेता और कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचने लगे. सौरभ भारद्वाज ने प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की थी और कहा था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा. जंतर-मंतर पहुंचने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

आखिर क्यों हो रहा है पूरा विवाद?

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ SIR प्रक्रिया से जुड़ी है. विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने का खतरा पैदा हुआ है. इसी को लेकर विपक्षी नेता चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया का उद्देश्य गलत, डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाना और मतदाता सूची को सही करना है. आयोग ने हाल में वोटर-रोल से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा का फैसला भी लिया है.

पहले भी हो चुका है जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

यह पहली बार नहीं है जब SIR को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन हुआ है. इससे पहले 26 सितंबर को भी जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया था. उस दौरान योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और दूसरे सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत 60 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था.

अब 2 अक्टूबर को एक बार फिर मामला सड़क पर आ गया है. दिल्ली में एक तरफ प्रदर्शनकारी CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती कर रही है.

फिलहाल जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है.