tnp desk: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम तो पूरे देश में चर्चा में है. इसके साथ ही राहुल गांधी का पहनावा भी कम चर्चा में नहीं है. राहुल गांधी सीधे छात्रों से बातचीत कर रहे हैं . अभी हाल ही में पुणे में हुए कार्यक्रम की खूब चर्चा हो रही हैं. पुणे में उन्होंने छात्राओं से सीधे बातचीत की. इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देश के लगभग 100 शहरों में किया गया था. धनबाद भी उसमें शामिल था. दरअसल, नेताओं को लेकर यह बात जेहन में है कि वह सफेद कुर्ता, पायजामे में ही नजर आते हैं. लेकिन राहुल गांधी पायजामा , कुर्ता से थोड़ा परहेज करते हैं.
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी सफेद टी-शर्ट पहने नजर आए थे. वह दूसरे नेताओं से उनका थोड़ा अलग अंदाज था. संसद में शामिल होने की बात हो अथवा आंदोलन करने की, राहुल गांधी अक्सर सफेद रंग की टीशर्ट में दिखते हैं. सर्दी में भी उनका यह पहनावा लगभग नहीं ही बदलता। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी सफेद टी-शर्ट पर दिख रहे थे, लेकिन "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम में उनके शर्ट की रंग बदल गई है. अब टी-शर्ट के बजाय शर्ट रंगीन हो गया है. कोटा में जब राहुल गांधी ने "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम की शुरुआत की थी, तो उन्होंने नीले रंग की शर्ट पहनी थी. देहरादून में उनके शर्ट का रंग पिंक हो गया. पुणे में उन्होंने पीले रंग की शर्ट पहन रखी थी.
पुणे में उन्होंने देश की आधी आबादी को सीधे संबोधित किया। राहुल गांधी फिलहाल इस समय युवा पीढ़ी को अपने साथ जोड़ना चाहते हालांकि इसके लिए भाजपा भी सक्रिय . नई-नई समितियां गठित की जा रही राहुल गांधी को मालूम है कि युवा शक्ति की वजह से ही भाजपा शासन में आई थी और बनी हुई . है. इस वोट बैंक को टारगेट करने के लिए राहुल गांधी छात्रों की बात कर रहे हैं. उनके ही अंदाज में खुद को बदलने की कोशिश कर रहे हैं. खास बात यह है कि कांग्रेस के कई नेता भी अब अपना पहनावा बदल रहे है.
इधर, भाजपा ने भी जेन -जी से जुड़ने तथा युवा संवाद अभियान को तेज करने के लिए एक विशेष समिति बनाई है. इस समिति का मुख्य उद्देश्य 14 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं की शिक्षा, करियर, तकनीक और आकांक्षाओं को समझना है. भाजपा के इस सभी समिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, गुजरात के मंत्री हर्ष सांगवी, छत्तीसगढ़ के मंत्री शामिल हैं. इसके तहत यह टीम यूनिवर्सिटी, स्कूल और डिजिटल माध्यमों से युवाओं के बीच जाकर उनकी राय और उम्मीद को जानने की कोशिश करेगी।
