TNP DESK: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत के आम लोगों की जिंदगी पर साफ नजर आने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ रहा है. ईंधन महंगा होने से न सिर्फ लोगों का यात्रा खर्च बढ़ा है, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों पर भी अतिरिक्त बोझ महसूस किया जा रहा है. खास तौर पर नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
हालिया बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत में 2.16 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.17 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई है. झारखंड की राजधानी रांची में पेट्रोल 105.93 रुपये प्रति लीटर और डीजल 103.01 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है. वहीं बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 113.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि डीजल 110.47 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है. जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में भी ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. कई बड़े तेल उत्पादक देशों के बीच तनाव गहराने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी हुई है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाला हर उतार-चढ़ाव सीधे घरेलू कीमतों को प्रभावित करता है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ते ही देश में पेट्रोल और डीजल महंगे होने लगते हैं.
इससे पहले भी ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, जब पेट्रोल करीब 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3.14 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो गया था. उस दौरान झारखंड के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की कमी जैसी स्थिति बन गई थी. रांची समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई थीं और कई जगह लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा था. सप्लाई सामान्य होने में कई दिन लग गए थे.
लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों का असर अब केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं है. ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से सब्जियों, राशन, दूध और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. अगर मिडिल ईस्ट में हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा.
