टीएनपी डेस्क : बंगाल विधानसभा का चुनाव परिणाम आने के बाद क्या बंगाल भी महाराष्ट्र की राह पर चल दिया है? क्या अब ममता बनर्जी के हाथ से तृणमूल कांग्रेस का सिंबल भी छिन जाएगा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि तृणमूल कांग्रेस में नाराज विधायकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सूत्र बता रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 50 विधायकों ने पार्टी से निकाले गए दो विधायकों से मुलाकात की है. बता दें कि ममता बनर्जी ने दो विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है.
माना जा रहा है कि बहुत जल्द हो सकता है बड़ा खेल
माना जा रहा है कि बंगाल में एक बड़ा सत्ता पलट हो सकता है. रविवार को ममता बनर्जी की बुलाई गई बैठक में केवल 20 विधायक ही पहुंचे थे. इतना ही नहीं, विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 तृणमूल पार्षदों ने भी इस्तीफा दे दिया है. अभिषेक बनर्जी को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा था और यह घटना तृणमूल के विधायकों को परेशान किए हुए है. सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के ऊपर अंडे और जूते फेंकें गए. सांसद कल्याण बनर्जी ने अगले दिन आरोप लगाया कि उनके सिर पर एक पत्थर मारा गया. तृणमूल के नेता जहां जा रहे विरोध में नारे लग रहे. इस तरह की घटनाओं से तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसदों चिंतित हैं. नेताओं को डर सता रहा है कि अगर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से उनका जुड़ाव बना रहा, तो राजनीतिक कैरियर बर्बाद हो सकता है.
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बहुत ही तेज है
कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी जिन्हें कभी जमीनी संघर्ष का चेहरा माना जाता था, अब धीरे-धीरे वह अपनी पकड़ खोती जा रही हैं. इधर, ममता बनर्जी 'इंडिया' मंच से भाजपा के खिलाफ फिर से उतरने की तैयारी कर रही हैं. हालांकि पार्टी के भीतर उथल-पुथल से उनकी विश्वसनीयता घट रही है. राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज है. तृणमूल कांग्रेस की स्थिति महाराष्ट्र की शिवसेना की तरह ही बनती दिख रही है. तृणमूल में बड़ी टूट की आशंका है. इधर , भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी किसी तृणमूल नेता या विधायक को अपने दल में नहीं शामिल करेगी. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के लिए हमारे दरवाजे बंद है. हमने किसी को भी बाहर से लाये बिना 208 का आंकड़ा छू लिया है.
