टीएनपी(TNP): भारत में नशे के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रही. तस्करों ने अब ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है. पिछले पांच वर्षों में ड्रोन के जरिए ड्रग्स की तस्करी के मामलों में करीब 100 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य पंजाब है, जहां भारत-पाकिस्तान सीमा के रास्ते लगातार नशीले पदार्थ भेजे जा रहे हैं.
ड्रोन से तस्करी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल ड्रोन से जुड़ी 305 तस्करी की घटनाएं दर्ज की गईं. इन मामलों में करीब 468 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए. खास बात यह है कि 305 में से 298 मामले अकेले पंजाब से जुड़े थे. इससे साफ है कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए ड्रग्स भेजने का सबसे बड़ा रास्ता पंजाब बन चुका है.
पांच साल में 100 गुना बढ़े मामले
साल 2021 में ड्रोन के जरिए तस्करी के सिर्फ तीन मामले सामने आए थे, लेकिन अब यह संख्या 305 तक पहुंच गई है. यानी पांच साल में करीब 100 गुना बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की तुलना में भी ऐसे मामलों में लगभग 98 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया.
हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स पर फोकस
सीमा पार से हाई प्यूरिटी हेरोइन, मेथमफेटामाइन और दूसरी सिंथेटिक ड्रग्स भारत भेजी जा रही हैं. इसके अलावा पंजाब में बड़ी मात्रा में कोडीन वाली कफ सिरप, ब्यूप्रेनॉर्फिन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी दवाओं की भी अवैध सप्लाई पकड़ी गई है. जांच एजेंसियों का कहना है कि इन दवाओं का गलत इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.
कूरियर और डाक भी बने तस्करी का जरिया
सिर्फ ड्रोन ही नहीं, बल्कि कूरियर और डाक सेवाओं का भी तस्कर जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. भले ही ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ी, लेकिन इन माध्यमों से करीब 972 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए. इससे पता चलता है कि तस्कर नए नए तरीके अपनाकर कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं.
गुप्त फैक्ट्रियों पर बड़ा एक्शन
एनसीबी ने पिछले साल देशभर में 30 अवैध सिंथेटिक ड्रग लैब को नष्ट किया और 102 लोगों को गिरफ्तार किया. जांच में सामने आया कि महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई गुप्त ठिकानों पर मेफेड्रोन, एफेड्रिन और गैर कानूनी साइकोट्रोपिक गोलियां बनाई जा रही थीं. अब एजेंसियां सिर्फ ड्रग्स पकड़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही हैं.
विदेशी तस्करों पर भी शिकंजा
ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों में 747 विदेशी नागरिक गिरफ्तार किए गए. इनमें सबसे ज्यादा 203 नेपाल, 146 नाइजीरिया और 97 म्यांमार के नागरिक शामिल हैं. जांच एजेंसियां अब केवल गिरफ्तारी ही नहीं कर रहीं, बल्कि तस्करी में इस्तेमाल होने वाले पैसों और आर्थिक नेटवर्क का भी पता लगा रही हैं.
कार्टेल की संपत्तियों पर कार्रवाई तेज
एनसीबी ने वित्तीय जांच को भी तेज किया है. पिछले साल 1,356 वित्तीय जांच के मामले दर्ज किए गए और ड्रग कार्टेल से जुड़ी करीब 836 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज की गईं. यह आंकड़ा पांच साल पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा है. इससे साफ है कि अब सरकार सिर्फ नशे की खेप पकड़ने के बजाय पूरे ड्रग नेटवर्क और उसकी आर्थिक ताकत को खत्म करने पर जोर दे रही है.
