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RBI में बड़ा बदलाव! कागज की जगह जल्द चलेंगे प्लास्टिक के पॉलीमर नोट, जमाखोरी और नकली करेंसी पर लगेगा ताला

Rashmi Prasad CE
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RBI में बड़ा बदलाव! कागज की जगह जल्द चलेंगे प्लास्टिक के पॉलीमर नोट, जमाखोरी और नकली करेंसी पर लगेगा ताला

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देश की बैंकिंग व्यवस्था और आम नागरिकों की जेब में जल्द ही एक बार फिर बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पारंपरिक कागज के नोटों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनकी जगह अत्यधिक सुरक्षित प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट चलन में लाने की तैयारी कर रहा है. पिछले कई दशकों से इस आधुनिक तकनीक पर लगातार चर्चा चल रही थी, लेकिन अब केंद्रीय बैंक और सरकार इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं. 'वॉइस ऑफ बैंकिंग' के संस्थापक अश्विनी राणा ने इस दूरगामी फैसले के पीछे की ठोस वजहों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि वर्तमान में हमारे बटुए में रहने वाले कागजी नोट (जो कॉटन और फाइबर के मिश्रण से बनते हैं) रिजर्व बैंक के लिए काफी खर्चीले साबित हो रहे हैं. आरबीआई को हर साल नए नोटों की छपाई और कटे-फटे नोटों को बदलने पर करीब ₹5,000 से ₹6,000 करोड़ खर्च करने पड़ते हैं. मौजूदा कागजी नोटों की अधिकतम उम्र महज 5 साल होती है, जबकि इसके विपरीत वॉटरप्रूफ और स्वेटप्रूफ पॉलीमर नोटों की उम्र इससे कई गुना ज्यादा होती है.

नकली नोटों के सिंडिकेट पर प्रहार

इस बड़े बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण असर देश की आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर पड़ेगा. विमुद्रीकरण (Demonetisation) के समय यह उम्मीद जताई गई थी कि नकली नोटों का कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है और आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से जाली नोटों की बरामदगी होती रहती है. विशेषज्ञों का मानना है कि कागजी नोटों की सुरक्षा विशेषताओं की नकल करना जालसाजों के लिए आसान होता जा रहा है. ऐसे में पॉलीमर या प्लास्टिक नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें बेहद उन्नत, जटिल और थ्री-डी सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना लगभग नामुमकिन होता है. यह तकनीक देश की अर्थव्यवस्था को नकली नोटों के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट और वित्तीय आतंकवाद के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित रखने में एक अचूक हथियार साबित होगी.

₹500 के नोटों की जमाखोरी और काले धन पर लगेगी लगाम

बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, इस रणनीतिक बदलाव के जरिए सरकार और आरबीआई एक तीर से दो निशाने साधने की तैयारी में हैं. बाजार से ₹2,000 के नोट को चलन से बाहर करने के बाद भी बैंकिंग सिस्टम के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है कि ₹500 के नोटों की एक बहुत बड़ी तादाद बाजार में सर्कुलेशन (लेनदेन) में दिखने के बजाय डंप हो चुकी है, यानी लोगों ने इसे अवैध रूप से जमा करके रख लिया है. जब सरकार कागजी नोटों को बदलकर नए प्लास्टिक नोट जारी करेगी, तो अलमारियों और लॉकरों में बंद ₹500 के इन पुराने नोटों को बाहर निकलना ही पड़ेगा और उन्हें बैंकों में जमा कराना होगा. इस पूरी प्रक्रिया से न केवल वित्तीय सिस्टम की गहरी सफाई होगी, बल्कि काले धन की अर्थव्यवस्था पर भी एक बार फिर से बेहद कड़ा और निर्णायक प्रहार किया जा सकेगा.

छोटे नोटों से होगी शुरुआत

दुनिया के कई विकसित और विकासशील देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और वियतनाम में पॉलीमर नोटों का सफल प्रयोग लंबे समय से चल रहा है. भारत में भी पूर्व में ₹10 के छोटे नोटों को ट्रायल के तौर पर बाजार में उतारने का प्रस्ताव आ चुका है. बैंकिंग विश्लेषकों की संभावना के अनुसार, आरबीआई सीधे बड़े नोटों के बजाय सुरक्षा के लिहाज से पहले ₹10, ₹20 या ₹100 के छोटे डिनॉमिनेशन के प्लास्टिक नोटों से इसकी शुरुआत कर सकता है. हालांकि, वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मिडिल ईस्ट में चल रहे तनावों के चलते सरकार और केंद्रीय बैंक फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं ताकि आम जनता को किसी भी तरह की व्यावहारिक असुविधा का सामना न करना पड़े. कागज से प्लास्टिक करेंसी की ओर बढ़ने का यह ऐतिहासिक फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, पारदर्शी और कम लागत वाली बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है.