INDIA

भारत का बदलता रेलवे: वंदे भारत से अमृत भारत तक कितना बदला सफर?

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क: भारतीय रेलवे देश की लाइफलाइन है. हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. पिछले कुछ वर्षों में रेलवे में तेजी से बदलाव देखने को मिला है. नई और तेज ट्रेनों के साथ आधुनिक स्टेशन, बेहतर सुरक्षा और यात्री सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है. वंदे भारत से लेकर अमृत भारत तक रेलवे का सफर अब नई रफ्तार और नई तकनीक की ओर बढ़ रहा है. सवाल है कि इन बदलावों से आम यात्री का सफर कितना बदला है.

2019 में शुरू हुआ बदलाव का नया दौर

भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की चर्चा जब भी होती है, वंदे भारत एक्सप्रेस का नाम सबसे पहले आता है. देश में पहली वंदे भारत ट्रेन फरवरी 2019 में नई दिल्ली और वाराणसी के बीच शुरू हुई थी. इसे पहले ट्रेन-18 के नाम से तैयार किया गया था.

यह ट्रेन पूरी तरह भारत में विकसित सेमी हाई-स्पीड ट्रेन के तौर पर सामने आई. इसमें ऑटोमैटिक दरवाजे, आधुनिक सीटें, बेहतर रोशनी, मोबाइल चार्जिंग, इंफॉर्मेशन सिस्टम और साफ-सुथरे शौचालय जैसी सुविधाएं दी गईं. सबसे बड़ी बात यह थी कि यात्रियों को तेज रफ्तार के साथ आधुनिक यात्रा का अनुभव देने की कोशिश की गई.

इसके बाद धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों को वंदे भारत से जोड़ा गया. इससे लोगों के बीच तेज और सुविधाजनक रेल यात्रा की उम्मीद बढ़ी.

वंदे भारत से आगे क्यों बढ़ना पड़ा?

वंदे भारत ने तेज यात्रा की जरूरत को पूरा किया, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी थीं. मुख्य रूप से चेयर कार वाली इस ट्रेन में रातभर की लंबी यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए स्लीपर सुविधा नहीं थी.

भारत जैसे बड़े देश में जहां एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने में 15 से 30 घंटे तक लग सकते हैं, वहां स्लीपर ट्रेन की जरूरत हमेशा बनी रहती है. यही वजह है कि रेलवे ने आधुनिक सुविधाओं के साथ ऐसी ट्रेन पर ध्यान देना शुरू किया जो आम यात्रियों और लंबी दूरी के सफर दोनों के लिए उपयोगी हो.

2023 में आई अमृत भारत एक्सप्रेस

इसी सोच के साथ अमृत भारत एक्सप्रेस को रेलवे के नए मॉडल के रूप में सामने लाया गया. दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई.

अमृत भारत एक्सप्रेस को खास तौर पर सामान्य और मध्यम वर्ग के यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया. इसमें एसी कोच के बजाय जनरल और स्लीपर कोच पर ज्यादा जोर दिया गया. यानी ऐसी ट्रेन बनाने की कोशिश हुई जिसमें किराया अपेक्षाकृत किफायती रहे और यात्रियों को पुरानी ट्रेनों के मुकाबले बेहतर सुविधाएं भी मिलें.

अमृत भारत में क्या बदला?

अमृत भारत एक्सप्रेस की खासियत इसका पुश-पुल सिस्टम है. ट्रेन के दोनों सिरों पर इंजन लगाए जाते हैं. इससे ट्रेन को तेज गति पकड़ने और कई जगहों पर यात्रा समय कम करने में मदद मिल सकती है.

ट्रेन में आधुनिक सीट और बर्थ, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, एलईडी लाइट, बेहतर शौचालय, यात्री सूचना प्रणाली और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं दी गई हैं. इसका मकसद यह है कि सामान्य और स्लीपर श्रेणी के यात्रियों को भी ज्यादा सुविधाजनक सफर मिल सके.

यानी वंदे भारत जहां आधुनिक और तेज चेयर कार यात्रा की पहचान बनी, वहीं अमृत भारत ने किफायती लंबी दूरी की यात्रा को आधुनिक बनाने की कोशिश की.

सिर्फ ट्रेन नहीं, स्टेशन भी बदल रहे हैं

भारतीय रेलवे का बदलाव केवल नई ट्रेनों तक सीमित नहीं है. रेलवे स्टेशनों को भी आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है.

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देश के बड़ी संख्या में स्टेशनों को नया रूप देने की योजना बनाई गई है. इन स्टेशनों पर बेहतर वेटिंग एरिया, लिफ्ट, एस्केलेटर, साफ-सफाई, दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाएं और बेहतर यात्री सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.

कई स्टेशनों की नई डिजाइन में स्थानीय संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान को भी शामिल किया जा रहा है. यानी स्टेशन अब सिर्फ ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं, बल्कि शहर की पहचान का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही है.

आम यात्री के लिए कितना बदला सफर?

अगर आसान भाषा में समझें तो रेलवे में बदलाव तीन स्तरों पर दिखाई देता है. पहला बदलाव ट्रेन में हुआ है. वंदे भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनों ने यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं का अनुभव दिया है.

दूसरा बदलाव स्टेशनों पर हुआ है. कई स्टेशनों पर पहले के मुकाबले बेहतर यात्री सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.

तीसरा बदलाव रेलवे के पूरे नेटवर्क में हो रहा है. ट्रैक, बिजलीकरण, सिग्नलिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है.

आगे का रेलवे कैसा होगा?

भारतीय रेलवे अब सिर्फ पुरानी ट्रेनों की जगह नई ट्रेनें चलाने तक सीमित नहीं रहना चाहता. भविष्य में तेज रफ्तार ट्रेन, आधुनिक स्टेशन, बेहतर ट्रैक, डिजिटल टिकटिंग, मजबूत सुरक्षा और नई तकनीक को एक साथ जोड़ने पर जोर रहेगा.

वंदे भारत ने भारतीय रेलवे को तेज रफ्तार और आधुनिक यात्रा की दिशा दिखाई. अमृत भारत ने इस बदलाव को सामान्य और मध्यम वर्ग के यात्रियों तक पहुंचाने की कोशिश की. वहीं वंदे भारत स्लीपर लंबी दूरी की यात्रा को नया अनुभव देने की दिशा में अगला कदम है.

कुल मिलाकर भारतीय रेलवे का सफर अब सिर्फ पुरानी ट्रेन से नई ट्रेन तक पहुंचने का नहीं है. यह पूरी रेल व्यवस्था को आधुनिक बनाने की कोशिश है. असली सफलता तभी मानी जाएगी जब यह बदलाव देश के बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों और आम यात्रियों तक भी समान रूप से पहुंचे.