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NEET पेपर लीक से शुरू हुआ आंदोलन धर्म और राजनीति तक कैसे पहुंचा? पढ़िए अब तक CJP आंदोलन में क्या-क्या हुआ

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer
NEET पेपर लीक से शुरू हुआ आंदोलन धर्म और राजनीति तक कैसे पहुंचा? पढ़िए अब तक CJP आंदोलन में क्या-क्या हुआ

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया पर 22 मिलियन फॉलोअर्स के साथ दमखम के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर 25 दिन पहले आंदोलन शुरू किया. इस पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपक ने एक नेक सोच के साथ इस आंदोलन की शुरुआत की, जिसका एक ही मुद्दा था- पेपर लीक को कैसे रोका जाए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तिफा हो. इस एक मुद्दे के साथ रोजाना हजारों लोग धरना स्थल पर पहुंचे और इसको मजबूती से साथ देते रहे थे. वहीं इसके साथ ही कई नामचीन चेहरे भी इस आंदोलन में कूद पड़े, जिससे अभिजीत दीपक को हिम्मत मिली.लेकिन इसके बीच प्रसिद्ध वैज्ञानिक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की एंट्री हुई, जिसने इस आंदोलन को देशव्यापी बना दिया.हर तरफ इस आंदोलन की चर्चा भी हुई.

 पढ़िए अब तक CJP आंदोलन में क्या-क्या हुआ

आज आंदोलन को 25 दिन हो चुके है.सोनम वांगचुक आज भी भूख हड़ताल पर है. उनकी एक ही मांग है कि वह नीट पेपर लीक को लेकर सरकार से जवाब चाहते है.लेकिन भले ही सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक के मुद्दे से नहीं भटके , लेकिन आंदोलन में शामिल कुछ लोगों ने इसको धर्म और राजनीति की तरफ मोड़ दिया गया.अब सिलसिलेवार तरीके से हम आपको बताने वाले है कि कैसे नीट पेपर लीक के मुद्दे को छोड़कर यह आंदोलन धर्म, राजनीति और प्रचार का शिकार हुआ.

आंदोलन के बीच कहीं खो गया असली मुद्दा

दरअसल, अभिजीत दीपक ने ऐलान किया था कि नीट पेपर लीक को लेकर वह सरकार से जवाब मांगेंगे, जिसे देखकर देशभर से छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचे.यहां तक सब कुछ ठीक था, लेकिन आंदोलन के बीच कुछ ऐसी अटपटी हरकतें अभिजीत दीपक की तरफ से हुईं, जिससे वहां मौजूद छात्रों का मुद्दे से ध्यान भटकने लगा.सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो में देखने को मिला कि स्टेज पर सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे है और आसपास कुछ लोग पिज्जा, बर्गर और कचौड़ियां खा रहे है. हालांकि इन वीडियो की पुष्टि हम नहीं करते है, लेकिन सोशल मीडिया पर इनकी काफी चर्चा हुई.इसी बीच सोनम वांगचुक ने भी मंच से लोगों से अपील की कि कम से कम एक दिन की भूख हड़ताल वो करें और इस तरह ठूंस-ठूंस कर खाना अच्छा नहीं लगता.

सोशल मीडिया के जरीये देश की रही आंदोलन पर नजर

अब बता दें कि जंतर-मंतर पर पूरा देश नहीं पहुंचा था.देश वही देख रहा था, जो सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए उसे दिखाया जा रहा था. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और मंच पर आए कुछ नामचीन चेहरों के बयानों ने आंदोलन की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए.कुछ लोगों ने नीट मुद्दे को छोड़कर मेरा लिंग मेरी मर्जी.... जैसे नारे लगाए.वहीं कुछ लोगों ने हिंदू धर्म को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं, प्रभु श्रीराम को लेकर बयान दिए और कुछ जगहों पर बस रहेगा नाम अल्लाह का....जैसे नारे भी लगाए गए.इससे कई लोग असमंजस में पड़ गए, क्योंकि आंदोलन की शुरुआत नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुई थी.अब इसमे हिंदू और मुस्लिम कहां से गया यही वजह थी कि कई लोग समर्थन के बावजुद वहां नहीं पहुंच सके.

आंदोलन के दौरान संसद भवन को तोड़ने से लेकर पीएम मोदी को मारने तक के दिए गए बयान

इसके बाद संसद भवन घेरने, पीएम मोदी को लेकर विवादित बयान और तोड़फोड़ जैसी बातें सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की. सीजेपी के समर्थकों ने वीडियो जारी कर पुलिस की कार्रवाई दिखाई, लेकिन पुलिस पर हुई पत्थरबाजी का पक्ष भी सामने आया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए.वहीं लाठीचार्ज में प्रदर्शनकारी भी घायल हुए. अब सवाल यह उठता है कि नीट पेपर लीक का मुद्दा आखिर कहां गायब हो गया. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के बीच हिंदू-मुस्लिम धर्म और अन्य विवादित मुद्दे कहां से आ गए. आंदोलन को शुरू हुए 25 दिन हो चुके है.और सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर सरकार की तरफ से संतोषजनक जवाब मिलता है और ki नीट पेपर लीक पर समाधान होता है, तो वह अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे. अब देखने वाली बात होगी कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और सरकार इस पर क्या जवाब देती है.

इस तरह कमजोर हुआ आंदोलन

अब तक के 25 दिनों के आंदोलन को देखा जाए तो इस आंदोलन को मजबूती से शुरू किया गया था. कुछ लोगों ने इसको मजबूती भी दी, जिसमें सोनम वांगचुक का नाम सबसे पहले स्थान पर है.हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी नामचीन चेहरे सामने आए, जिन्होंने इस मुद्दे को भटका दिया और इसको कमजोर करने का भी काम किया, जिसमें अभिनेता प्रकाश राज, अभिनेत्री स्वरा भास्कर, हास्य कलाकार कुणाल कामरा आदि का नाम शामिल था.इनकी वजह से काफी ज्यादा विवादों में आंदोलन गया. लोगों का एक ही कहना था कि मुद्दा नेट का पेपर लीक है. पूरा देश आपके साथ है लेकिन इस तरह से धर्म की राजनीति करना पूरी तरह से गलत है. जिसकी वजह से लोगों ने इस आंदोलन से दूरी बना ली है.