टिएनपी डेस्क(TNP DESK): दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला PG बिल्डिंग के गिरने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पूरी इमारत एक साथ कैसे ढह गई. शुरुआती जांच और स्थानीय लोगों के बयानों में कई ऐसी बातें सामने आई हैं, जो बिल्डिंग की मजबूती और उसमें चल रहे काम पर सवाल खड़े करती हैं. इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी बताई जा रही है और इसके बेसमेंट में हादसे से पहले मरम्मत और तोड़फोड़ का काम चल रहा था.
सोमवार को मलबे से एक और शव मिलने के बाद मौतों का आंकड़ा 7 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है. 12 लोगों को बचाया गया है, जबकि गंभीर घायलों का इलाज चल रहा है. मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच बचाव अभियान जारी है.
कब बनी थी बिल्डिंग, पिछले साल बना था हॉस्टल
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरी हुई इमारत करीब चार से पांच दशक पुरानी थी. हालांकि इसके निर्माण का सटीक साल अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है. सत्य निकेतन इलाके को DDA ने 1968 में बसाया था. उस समय यहां छोटे आवासीय प्लॉट बनाए गए थे. समय के साथ इनमें से कई मकानों में अतिरिक्त निर्माण हुआ और बड़ी संख्या में मकान PG और प्राइवेट हॉस्टल में बदल गए. जिस इमारत में हादसा हुआ, उसे पिछले साल छात्र हॉस्टल में बदले जाने की बात सामने आई है.
क्यों गिरी बिल्डिंग, इन वजहों पर जांच
शुरुआती जानकारी में हादसे के पीछे कई कारणों की जांच हो रही है. बेसमेंट में पानी जमा था और वहां मरम्मत का काम भी चल रहा था. स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब सात दिनों से बेसमेंट में काम किया जा रहा था. आशंका है कि पानी और निर्माण कार्य के कारण पहले से पुराना स्ट्रक्चर और कमजोर हुआ.
इस हादसे ने सत्य निकेतन में पुरानी इमारतों की सुरक्षा का सवाल एक बार फिर खड़ा कर दिया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 15 साल में इलाके में बिल्डिंग गिरने की यह चौथी घटना है. इससे पहले 2022 में भी यहां एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी.
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस से सटा इलाका है. यहां छोटे प्लॉट पर बनी पुरानी इमारतों में बड़ी संख्या में PG और हॉस्टल चल रहे हैं. आसपास वेंकटेश्वर, आर्यभट्ट, मोतीलाल नेहरू और दूसरे कॉलेज होने के कारण हजारों छात्रों की आवाजाही रहती है.
हादसे के बाद बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल की भूमिका भी जांच के दायरे में है. पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया है और उसकी तलाश की जा रही है. हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं.
पास की एक और बिल्डिंग में भी दरारें मिलने के बाद उसे खाली कराया गया है. अब जांच का फोकस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि बिल्डिंग कैसे गिरी, बल्कि इस पर भी है कि दशकों पुरानी इमारत में इतने बड़े स्तर पर PG कैसे चल रहा था, मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन हुआ या नहीं और समय रहते खतरे को क्यों नहीं पहचाना गया.