टीएनपी डेस्क: 1975 में स्थापित कोल इंडिया लिमिटेड अब इस्पात उद्योग के लिए बड़ा प्रदाता यूनिट बनने की ओर अग्रसर है. कोयले के बाद अब लोह अयस्क भी कोल इंडिया उत्पादित करेगा. जानकारी के अनुसार कोल इंडिया ने लोह अयस्क खनन के काम में कदम बढ़ा दिया है. ओडिशा के क्योझर में लोह अयस्क ब्लॉक के लिए कंपनी को प्राथमिक बोलीदाता चुना गया है. यह कोल इंडिया की पहला लोह अयस्क ब्लॉक होगा. हालांकि अभी कई नियमों से कोल इंडिया को गुजरना पड़ेगा, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि कोल इंडिया इसमें बाजी मार लेगी.
फिलहाल देश में कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक है कोल इंडिया
कोल इंडिया फिलहाल देश में कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक है. हाल के दिनों में कंपनी ने अपने कार्यक्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव किया है. लोह अयस्क इस्पात निर्माण का प्रमुख कच्चा माल है. कोकिंग कोल् भी कोल इंडिया के पास है. ऐसे में इस्पात उद्योग के लिए कोल इंडिया अब महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. देश में 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात निर्माण का लक्ष्य रखा गया है. बताया जाता है कि ओडिशा का लोह अयस्क क्योंझर ब्लॉक 265 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. भारत में खनिज ब्लॉकों की नीलामी खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन अधिनियम 1957 और केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित नीलामी नियमों के तहत होती हैं.
कोल इंडिया को कई वैधानिक मंजूरी पूरी करनी होगी
किसी भी प्राथमिक बोलीदाता को सफल घोषित होने से पहले सभी वैधानिक मंजूरी पूरी करनी होती है. अब कोल इंडिया को इसके लिए 1 वर्ष का समय मिलेगा. कोल इंडिया का मुख्य कारोबार फिलहाल कोयला ही है और आने वाले वर्षों में भी देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयला महत्वपूर्ण बना रहेगा, बावजूद कंपनी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने कारोबार में विविधता लाने पर जोर दे रही है. लौह अयस्क में प्रवेश इसी सोच का हिस्सा है. नए खनिज क्षेत्रों में कारोबार बढ़ने से कंपनी के पास भविष्य में आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का अवसर होगा. इससे बदलते ऊर्जा और औद्योगिक परिदृश्य में कंपनी को अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
