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बड़ी खबर:मुंबई के ताज होटल पर लगा 22 करोड़ का जुर्माना, 17 साल पुराने सुरक्षा इंतजाम पर उठे सवाल

Diksha Benipuri
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बड़ी खबर:मुंबई के ताज होटल पर लगा 22 करोड़ का जुर्माना, 17 साल पुराने सुरक्षा इंतजाम पर उठे सवाल

TNP DESK: 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद ताज महल पैलेस होटल के बाहर सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरियर और बोलार्ड अब नए विवाद का कारण बन गए हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने होटल प्रबंधन को करीब 22 करोड़ रुपये के बकाया शुल्क का नोटिस जारी किया है. महानगरपालिका का दावा है कि सार्वजनिक सड़क और फुटपाथ पर लगाए गए सुरक्षा ढांचे के लिए तय नियमों के अनुसार शुल्क जमा करना आवश्यक है. वहीं, होटल प्रबंधन का कहना है कि ये सुरक्षा इंतजाम किसी व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए गए थे, इसलिए शुल्क में राहत मिलनी चाहिए.

BMC के अनुसार, मुंबई के कोलाबा स्थित ताज महल पैलेस होटल के बाहर 26/11 हमले के बाद कई स्थायी और अर्ध-स्थायी सुरक्षा बैरियर लगाए गए थे. इनमें एंटी-रैम बोलार्ड, सुरक्षा अवरोधक और अन्य संरचनाएं शामिल हैं, जो सार्वजनिक सड़क और फुटपाथ के हिस्से में स्थापित हैं. महानगरपालिका का कहना है कि ऐसे किसी भी ढांचे के लिए निर्धारित लाइसेंस शुल्क और अन्य प्रभार देना नियमों के तहत अनिवार्य है.

महानगरपालिका के अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2009 से इन सुरक्षा संरचनाओं के लिए देय शुल्क का पूरा भुगतान नहीं किया गया. समय के साथ ब्याज और अन्य देय राशि जुड़ने के कारण कुल बकाया बढ़कर लगभग 22 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. BMC का कहना है कि होटल प्रबंधन ने बीच-बीच में कुछ भुगतान जरूर किया है, लेकिन अभी भी बड़ी राशि बाकी है. इसी वजह से हाल ही में बकाया वसूली का नोटिस जारी किया गया है.

दूसरी ओर, ताज महल पैलेस होटल का प्रबंधन इस मामले में अलग पक्ष रख रहा है. होटल का कहना है कि सुरक्षा बैरियर किसी व्यवसाय का विस्तार करने या सार्वजनिक स्थान का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए नहीं लगाए गए थे. इन्हें 26 नवंबर 2008 के भीषण आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों की सलाह और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्थापित किया गया था. होटल प्रबंधन का तर्क है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मेहमानों, कर्मचारियों, स्थानीय नागरिकों और आसपास आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था. इसलिए इस मामले में शुल्क माफ करने या विशेष छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए.

यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है. वर्ष 2020 में तत्कालीन शिवसेना-यूबीटी के नेतृत्व वाली BMC की स्थायी समिति ने होटल को लगभग 10 करोड़ रुपये की राहत देने का प्रस्ताव मंजूर किया था. हालांकि बाद में 2025 में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक ने उस निर्णय को निरस्त कर दिया. इसके बाद यह मामला फिर से लंबित हो गया और अब नई नोटिस के साथ विवाद एक बार फिर चर्चा में है.

गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमलों में ताज महल पैलेस होटल आतंकवादियों के प्रमुख निशानों में शामिल था. कई घंटों तक चले इस हमले में 160 से अधिक लोगों की जान गई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे. इस घटना के बाद शहर के कई संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए थे और ताज होटल के बाहर भी स्थायी सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया था.

फिलहाल BMC और होटल प्रबंधन के बीच इस मुद्दे पर बातचीत जारी है. दोनों पक्ष समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में इस मामले पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सुरक्षा व्यवस्था को सार्वजनिक हित मानते हुए राहत दी जाएगी या फिर महानगरपालिका अपने नियमों के अनुसार पूरी बकाया राशि वसूलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी.