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बड़ी खबर: ममता बनर्जी का साथ देने वाले सांसद कीर्ति झा आज़ाद मुश्किल में ,एफआईआर को सीआईडी ने  किया टेकओवर

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

TNP DESK- बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भगवत झा आजाद के बेटे   और वर्तमान में बर्दवान -दुर्गापुर के तृणमूल सांसद कीर्ति झा आज़ाद  के खिलाफ बंगाल के  रानीगंज थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है.   सूत्रों के अनुसार रानीगंज थाने में दर्ज मुकदमे को सीआईडी ने टेकओवर कर लिया है.  अब माना  जा रहा है कि कीर्ति झा आज़ाद  की मुश्किलें  बढ़ सकती हैं.  सूचना के मुताबिक रानीगंज के रहने वाले राहुल घोष ने कई गंभीर आरोप लगाकर शिकायत दर्ज कराई  है.  रंगदारी वसूलने का भी आरोप  इसमें शामिल है.  सांसद  के साथ उनके निजी सुरक्षा अधिकारी सहित अन्य को आरोपी बनाया गया है. 

 राहुल घोष ने अपनी शिकायत में कहा है कि 21 मई  25 को सांसद कीर्ति झा के निजी सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह का फोन आने के बाद वह सांसद कीर्ति झा से दुर्गापुर स्थित उनके बंगले पर जाकर मुलाकात की थी.  जहां कीर्ति झा  ने एचपी गैस के उप डीलरशिप व्यवसाय बंद करने का दबाव बनाया और 15 लाख  रुपए की मांग की.  स्थानीय व्यापारियों से पैसा इकट्ठा कर देने का निर्देश भी  दिया।  सांसद  के चार सहयोगियों ने उनकी बात नहीं मानने पर जान से मारने की धमकी दी.  राहुल घोष ने    बातचीत का एक ऑडियो रिकॉर्ड सबूत के तौर पर होने का जिक्र शिकायत में किया है.  सूत्रों के अनुसार रानीगंज थाना में शुक्रवार की रात सांसद कीर्ति झा  आजाद और उनके अन्य चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी  दर्ज हुई और शनिवार को के सीआईडी ने केस को टेकओवर कर लिया। 

 अब पूरे मामले की जांच में सीआईडी जुट  गई है.  उल्लेखनीय है कि 2026 में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव हारने के बाद पार्टी में हुई टूट- फूट के बाद भी कीर्ति झा आजाद ममता बनर्जी के साथ खड़े दिख रहे हैं.  उन्होंने ममता बनर्जी का साथ किसी भी हालत में नहीं छोड़ने  का ऐलान किया था.  कीर्ति झा पहले भाजपा में थे, फिर कांग्रेस में आए और उसके बाद फिलहाल तृणमूल  कांग्रेस में हैं.  कीर्ति झा  धनबाद से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके है. जानकारी के अनुसार शिकायत के आधार पर रानीगंज थाना केस संख्या 352/2026 में सांसद सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 59/198/221/308(6)/262/263/351(3)/61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/7(A)/13(2)/ के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई.