INDIA

Bengal Politics: खोई जमीन वापस पाने के लिए ममता बनर्जी जाएंगी नंदीग्राम की शरण में, जानें BJP-TMC के लिए क्यों अहम है यह सीट

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बंगाल का नंदीग्राम सीट एक बार फिर चर्चा में है. सुवेंदु अधिकारी के लिए भी यह उपचुनाव महत्वपूर्ण होगा, तो ममता बनर्जी को सियासी ताकत देने में भी इस सीट का महत्व हो सकता है. सवाल किये जा रहे कि क्या ममता बनर्जी नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ेगी या तृणमूल के किसी दूसरे उम्मीदवार को खड़ा करेगी. हालांकि ममता बनर्जी की सक्रियता को देखते हुए अंदाज लगाया जा रहा है कि नंदीग्राम सीट से वह चुनाव लड़ सकती है. पश्चिम बंगाल में दो सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है. 

उपचुनाव में सबसे अधिक चर्चा उम्मीदवारों को लेकर है. हालांकि  बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस नंदीग्राम से किसे उम्मीदवार बनाएंगें, इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है. लेकिन अटकलों का दौर शुरू है. 6 अक्टूबर को नंदीग्राम उपचुनाव में वोट डाले जाएंगे और 9 को नतीजे घोषित होंगें. बंगाल की एक और सीट रेजीनगर में भी वोटिंग होगी. आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हिमायू कबीर के सीट छोड़ने के कारण यह सीट खाली हुई है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नंदीग्राम सीट छोड़ने के बाद उपचुनाव की वजह से इस सीट की सबसे अधिक चर्चा है. 

बता दे कि सुवेंदु अधिकारी की अगुवाई में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाई है. अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दो सीट से सुवेंदु अधिकारी चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को भवानीपुर में  हराया था और नंदीग्राम से भी चुनाव जीते थे. 2021 में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था. वैसे, ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर में नंदीग्राम का स्थान बहुत अहम है. 2007 में वाम मोर्चा सरकार के केमिकल हब प्रोजेक्ट के खिलाफ हुए नंदीग्राम किसान आंदोलन का नेतृत्व ममता बनर्जी ने किया था. 

14 मार्च 2007 को पुलिस गोलीबारी में 14 ग्रामीणों की जान चली गई थी. जिसके बाद तत्कालीन सरकार ने प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया था. सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन ने ममता बनर्जी को किसान नेता  नेता के रूप में स्थापित किया था. इसी आंदोलन की बदौलत 2011 में तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में 34 सालों से चले आ रहे वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका था. अब जब नंदीग्राम में फिर से उपचुनाव होने जा रहा है, तो पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी है कि क्या ममता बनर्जी अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने के लिए नंदीग्राम की शरण लेगी. बता दें कि 2026 में नंदीग्राम सीट पर सुवेंदु अधिकारी को 127,301 वोट मिले. वहीं टीएमसी की उम्मीदवार प्रतीभा कर को 117,636 वोट मिले. वहीं 2021 के चुनाव में अधिकारी को 110,764 वोट मिले थे. ममता बनर्जी को 108,808 वोट मिले थे.