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अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला : पढ़िए ताजा अपडेट, बैंक भी क्यों है सवालों के घेरे में,अब आगे क्या 

Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Senior Journalist

TNP DESK-अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में रोज नए-नए खुलासे  हो रहे हैं.  पुलिस को संदेह है कि बैंक कर्मियों की भी मिलीभगत हो सकती है.  और इसके लिए पुलिस बैंककर्मियों से भी पूछताछ  कर सकती है.  इस बीच एक बड़ी बात यह  सामने आई है कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने करीब 3 महीने पहले ही चंदा राशि की गिनती करने वाले कर्मचारियों पर संदेह  जताया था.  उन्हें हटाने की सिफारिश की थी.  लेकिन कार्रवाई नहीं हुई.  अब पुलिस इस दिशा में भी जांच कर सकती है.  बताया जाता है कि मंदिर की दान पेटी से निकलने वाली नगद राशि की गिनती का काम एसबीआई के माध्यम से एक आउटसोर्सिंग एजेंसी कर रही थी.  बैंक को करीब 3 महीना पहले ही राशि की गिनती में संदेह हुआ था.  इसके बाद उन्हें हटाने की सिफारिश की गई थी. 

2025 में ट्रस्ट और एसबीआई के बीच के निर्णय का क्यों नहीं हुआ पालन 

 इस मामले में अब तक 8 की गिरफ्तारी हुई है. मामले का ताजा अपडेट है कि घोटाले की जांच का दायरा  अयोध्या पुलिस और एसआईटी  ने  बढ़ा दिया है.  एसबीआई के 6 कर्मचारियों से पूछताछ की तैयारी है.  एजेंसियों को संदेह है कि मंदिर के दान पात्रों से पैसे गायब करने में बैंक के कुछ कर्मचारियों की भी भूमिका हो सकती है.  हालांकि बैंक ने स्पष्ट किया है कि वह जांच एजेंसी को हर संभव सहयोग दे रहा है  और बैंक इस मामले में सच्चाई सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है.  बताया जाता है कि 2025 में ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुए एक बैठक में नियम तय हुए थे कि पैसा गिनने  वाले स्टाफ के कपड़ों में कोई जेब  नहीं होगी।  उनके आने-जाने पर सुरक्षा गार्ड द्वारा चेकिंग की जाएगी, लेकिन इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था. 

महासचिव रहे चंपत राय से भी पुलिस ने की है पूछताछ 
 
नियमों के खिलाफ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के एक पूर्व ड्राइवर टीनू यादव के पास कई दान पात्रों  की चाबियां थी.  जानकारी के अनुसार चंदा चोरी मामले में अब पुलिस का शिकंजा ट्रस्ट के पदाधिकारियो  पर भी कसता  दिख रहा है.  महासचिव चंपत राय के इस्तीफा देते ही उनसे भी पुलिस ने पूछताछ की और बयान दर्ज किया है.  हालांकि एफआईआर  में चंपत राय या किसी पदाधिकारी का नाम नहीं है.  बता दें कि एसआईटी ने सबसे पहले चंपत राय से ही पूरे मामले की जानकारी ली थी और बयान दर्ज किया था.  एसआईटी  की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद ही पुलिस में  एफआईआर  कराई गई थी.  सूत्रों के अनुसार अगले चरण में ट्रस्ट के अन्य प्रमुख पदाधिकारियो  के भी बयान पुलिस दर्ज कर सकती है. इस बीच  अयोध्या में राम मंदिर चंदा चोरी में गिरफ्तार आरोपियों की कोई अधिवक्ता पैरवी  नहीं करेंगें।  अयोध्या में फैजाबाद बार एसोसिएशन ने  सर्व सहमति  से यह फैसला किया है.  बार में सोमवार को इसे लेकर विशेष बैठक बुलाई और प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है.