टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज के समय में डायबिटीज तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में शामिल है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि डायबिटीज होने से पहले शरीर एक चेतावनी देता है, जिसे प्री-डायबिटीज (Pre-Diabetes) कहा जाता है. यह ऐसी स्थिति होती है, जब ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना नहीं बढ़ता कि उसे टाइप-2 डायबिटीज कहा जाए. यदि इस अवस्था को समय रहते पहचान लिया जाए और जीवनशैली में बदलाव कर लिया जाए, तो डायबिटीज होने का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.
प्री-डायबिटीज क्या होती है?
डॉक्टरों के अनुसार, प्री-डायबिटीज वह स्थिति है जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता या इंसुलिन की प्रभावशीलता कम होने लगती है. इसके कारण ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है. कई लोगों को इस दौरान कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी माना जाता है.
डॉक्टर क्या कहते हैं?
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और फिजिशियन बताते हैं कि प्री-डायबिटीज कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक चेतावनी संकेत है. यदि इस समय खानपान, व्यायाम और वजन पर ध्यान दिया जाए, तो टाइप-2 डायबिटीज को टाला जा सकता है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, उन्हें नियमित ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए.
प्री-डायबिटीज के संभावित लक्षण
हालांकि अधिकतर लोगों में कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं.
- बार-बार प्यास लगना.
- सामान्य से अधिक भूख लगना.
- बार-बार पेशाब आना.
- लगातार थकान महसूस होना.
- धुंधला दिखाई देना.
- वजन का धीरे-धीरे बढ़ना.
- गर्दन, बगल या शरीर के कुछ हिस्सों की त्वचा का काला पड़ना (कुछ मामलों में).
इन लक्षणों के होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
कुछ लोगों में प्री-डायबिटीज का जोखिम अधिक होता है.
- 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र.
- मोटापा या पेट के आसपास अधिक चर्बी.
- शारीरिक गतिविधि की कमी.
- परिवार में डायबिटीज का इतिहास.
- हाई ब्लड प्रेशर.
- हाई कोलेस्ट्रॉल.
- गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज (Gestational Diabetes) का इतिहास.
जांच क्यों जरूरी है?
डॉक्टरों के अनुसार, प्री-डायबिटीज की पुष्टि के लिए फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c टेस्ट और ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT) जैसे परीक्षण किए जाते हैं. समय पर जांच से बीमारी का पता चल जाता है और उचित कदम उठाए जा सकते हैं.
प्री-डायबिटीज से कैसे बचें?
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ आसान बदलाव अपनाकर इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है.
- रोज कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलें या व्यायाम करें.
- वजन को नियंत्रित रखें.
- मीठे पेय और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें.
- हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन खाएं.
- पर्याप्त नींद लें.
- तनाव को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें.
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें.
डॉक्टर की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की रिपोर्ट में प्री-डायबिटीज की पुष्टि होती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. सही समय पर अपनाई गई स्वस्थ जीवनशैली और नियमित मेडिकल फॉलो-अप से ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर लाया जा सकता है. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए.
