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पेपर कप में चाय पीने से पहले पढ़ लें यह खबर, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान, जानिए पूरा सच

Varsha Varma CE
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पेपर कप में चाय पीने से पहले पढ़ लें यह खबर, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान, जानिए पूरा सच

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): ट्रेन, बस स्टैंड, ऑफिस, कॉलेज या सड़क किनारे की टपरी... आजकल चाय और कॉफी पीने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल पेपर कप का ही होता है. ज्यादातर लोग मानते हैं कि प्लास्टिक कप की तुलना में पेपर कप ज्यादा अच्छा होता है लोगों को लगता है कि पेपर कप में चाय पीना हानिकारक नहीं जबकि प्लास्टिक की में चाय पीने से उनके सेहत पर असर पड़ सकता है लेकिन अगर वह पेपर कप मे चाय पीएगे तो उन्हें कुछ नहीं होगा. लेकिन क्या वाकई ये सही है. जिस पेपर कप को लोग सुरक्षित समझकर इस्तेमाल कर रहे हैं, वह धीरे-धीरे शरीर में ऐसे सूक्ष्म कण पहुंचा सकता है जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं.

ज्यादातर लोगों को लगता है कि पेपर कप पूरी तरह कागज से बना होता है, लेकिन ऐसा नहीं होता है. पेपर कप के अंदर एक पतली प्लास्टिक कोटिंग की जाती है, ताकि चाय, कॉफी या दूसरे तरल चीज कप से बाहर न रिसें. आमतौर पर इसके लिए पॉलीइथिलीन जैसी प्लास्टिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. जब इन कपों में गर्म चाय .या फिर दूसरी कोई तरल चीज डाले जाते हैं, तो ऊष्मा के प्रभाव से यह परत धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है. जिसके बाद छोटे प्लास्टिक कण, जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है, पेय पदार्थ में मिल सकते हैं और फिर शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं.

गर्म पदार्थों के संपर्क में आने के कुछ ही मिनटों बाद पेपर कप की अंदरूनी परत से सूक्ष्म प्लास्टिक कण निकलने लगते हैं. लगभग 15 मिनट तक गर्म चाय या किसी दूसरी चीजों को रखने पर बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक घुल सकते हैं. यदि कोई व्यक्ति राज कई बार पेपर कप में चाय या कॉफी पीता है, तो समय के साथ उसके शरीर में हजारों माइक्रोप्लास्टिक कण पहुंच सकते हैं. आज कल किसी भी जगह जाय पीने जाते है तो उन्हें कागज के ही कप मे दिया जाता है. जिससे धीरे- धीरे रोजना आपके शरीर में माइक्रोप्लास्टिक कण पहुंचते है तो हमें या फिर आपको समझ में नहीं आता है और बाद में कई गंभीर बिमारी का घर बन जाता है और हमें लगता है कि ये सब कुछ अचानक हो गया लेकिन ऐसा नहीं है वह हमारे शरीर मे धीरे धीरे बीमारी को पैदा करता है औपृर हमें बाद में इसका एहसास होता है.

माइक्रोप्लास्टिक के लगातार संपर्क को कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा जा रहा है. अगर आप रोजना पेपर कप का इस्तमाल करते है तो हार्मोनल असंतुलन की संभावना होती है,  प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है, बच्चों के विकास पर असर होता है मोटापा और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ता है, लंबे समय में गंभीर बीमारियों का भी खतरा हो सकता है. हालांकि कैंसर को लेकर अभी और शोध की आवश्यकता है, लेकिन एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जहां तक संभव हो, चाय और कॉफी के लिए स्टील, कांच, चीनी मिट्टी बर्तनों का इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है. इसके अलावा गर्म चीज को लंबे समय तक पेपर कप में रखने से भी बचना चाहिए.

पेपर कप प्लास्टिक कप की तुलना में बेहतर विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित मान लेना सही नहीं होगा. इसलिए अगली बार जब आप पेपर कप में चाय या कॉफी पिएं, तो यह जरूर याद रखें कि सुविधा के साथ-साथ स्वास्थ्य को समझना भी उतना ही जरूरी है.