HEALTH

AI और गूगल से मिली अधूरी जानकारी बढ़ा रही मरीजों की परेशानी, इलाज में डॉक्टरों को हो रही दिक्कत

Rashmi Prasad CE
Copy Editor
AI और गूगल से मिली अधूरी जानकारी बढ़ा रही मरीजों की परेशानी, इलाज में डॉक्टरों को हो रही दिक्कत

टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज के रोजमर्रा की जिंदगी में इंटरनेट हमारे जीवन में अहम हिस्सा बन चुका है. किसी के बारे में जानना हो तो हम तुरंत इंटरनेट की मदद से जान लेते है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, किसी भी सवाल का जवाब चाहिए तो लोग तुरंत स्मार्टफोन निकालकर गूगल (Google) या एआई (AI) का रुख करते हैं. लेकिन कई लोग इतना निर्भर हो जाते है की एक आम इंसान की वो कब आदत बन जाए पता ही नहीं चलता.  यह आदत सामान्य जानकारियों तक तो ठीक है, लेकिन जब बात सेहत और बीमारियों की आती है, तो यह 'डिजिटल ज्ञान' वरदान के बजाय एक बड़ा अभिशाप साबित हो रहा है.

बता दे, देश-दुनिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट और AI से मिलने वाली अधूरी, आधी-अधूरी और कभी-कभी पूरी तरह गलत जानकारी मरीजों की परेशानी को कम करने के बजाय और बढ़ा रही है. स्थिति यह हो गई है कि अब अस्पतालों में डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करने से ज्यादा समय उनके दिमाग में भरे 'इंटरनेट के भ्रम' को दूर करने में लगाना पड़ रहा है.

'साइबरकॉन्ड्रिया': इंटरनेट जनित एक नई बीमारी

चिकित्सा की भाषा में इस समस्या को 'साइबरकॉन्ड्रिया' (Cyberchondria) कहा जा रहा है. यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति इंटरनेट पर किसी बीमारी के लक्षणों को पढ़कर खुद को उस गंभीर बीमारी से पीड़ित मानने लगता है.

उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो, अगर किसी व्यक्ति को सामान्य सिरदर्द है और वह इसके कारण गूगल या किसी एआई चैटबॉट पर सर्च करता है, तो सर्च रिजल्ट्स में उसे सामान्य थकान से लेकर 'ब्रेन ट्यूमर' तक के लक्षण दिखा दिए जाते हैं. नतीजा यह होता है कि मरीज बिना किसी डॉक्टरी सलाह के अत्यधिक तनाव, एंग्जायटी (घबराहट) और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है. एआई टूल्स कई बार डेटा के आधार पर संभावित बीमारियों की एक लंबी लिस्ट सामने रख देते हैं, जिससे मरीज बिना वजह खौफ में जीने लगता है.

डॉक्टरों के लिए 3 बड़ी चुनौतियां

मरीजों के इस 'गूगल ज्ञान' की वजह से क्लीनिक और अस्पतालों में डॉक्टरों को रोजाना कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है:

  • सेल्फ-मेडिकेशन (खुद से इलाज करना): इंटरनेट पर पढ़कर लोग खुद ही अपनी बीमारी तय कर लेते हैं और मेडिकल स्टोर से जाकर दवाइयां खरीद लेते हैं. सबसे ज्यादा नुकसान एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर्स के मामले में हो रहा है, जिससे मरीजों के लिवर, किडनी पर बुरा असर पड़ रहा है और 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' (दवाइयों का बेअसर होना) का खतरा बढ़ रहा है.
  • इलाज और डायग्नोसिस में देरी: कई बार गंभीर लक्षणों को लोग इंटरनेट के घरेलू नुस्खों या अधूरी सलाह के भरोसे नजरअंदाज कर देते हैं. जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तब वे डॉक्टर के पास भागते हैं. तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है और इलाज जटिल हो जाता है.
  • डॉक्टरों पर अविश्वास: आजकल मरीज डॉक्टर के केबिन में जाने से पहले ही अपनी बीमारी का 'रिसर्च' करके जाते हैं. जब डॉक्टर उनकी सोच से अलग दवा या थेरेपी लिखता है, तो मरीज डॉक्टर की योग्यता पर ही संदेह करने लगते हैं. इससे डॉक्टर और मरीज के बीच का भरोसा कमजोर हो रहा है.

एआई और गूगल क्यों नहीं ले सकते डॉक्टर की जगह?

मरीजों को यह समझना होगा कि इंटरनेट और एआई सिर्फ एक एल्गोरिदम (Algorithm) पर काम करते हैं, उनके पास इंसानी सूझबूझ और मेडिकल अनुभव नहीं होता.

मेडिकल साइंस का मूल सिद्धांत: हर इंसान का शरीर, उसकी मेडिकल हिस्ट्री, जेनेटिक्स और किसी दवा के प्रति उसकी प्रतिक्रिया पूरी तरह से अलग होती है.

गूगल आपको यह बता सकता है कि किसी बीमारी के सामान्य लक्षण क्या हैं, लेकिन वह आपकी नब्ज देखकर, आपकी आंखों की पीलापन देखकर या आपके पारिवारिक इतिहास को समझकर सटीक डायग्नोसिस नहीं कर सकता. चिकित्सा के क्षेत्र में डिग्री, सालों की ट्रेनिंग और क्लिनिकल अनुभव का कोई डिजिटल विकल्प नहीं हो सकता.

डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए डॉक्टर की सलाह

अगर आप भी अपनी छोटी-मोटी तकलीफों के लिए इंटरनेट पर निर्भर रहते हैं, तो डॉक्टरों की इन बातों को जरूर नोट कर लें:

  • सर्च बंद करें, डॉक्टर से मिलें: शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण दिखने पर इंटरनेट पर सर्च करने के बजाय सीधे किसी योग्य डॉक्टर से परामर्श लें.
  • सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट्स पर भरोसा करें: अगर किसी बीमारी के बारे में पढ़ना ही है, तो केवल प्रामाणिक और सरकारी स्वास्थ्य वेबसाइटों (जैसे WHO या स्वास्थ्य मंत्रालय की साइट्स) का रुख करें. सोशल मीडिया के रील्स या अनवेरिफाइड ब्लॉग्स से बचें.
  • एआई को डॉक्टर न बनाएं: एआई टूल्स केवल आपके संदर्भ के लिए हैं, वे आपकी बीमारी का इलाज ढूंढने या दवाइयां पर्चे पर लिखने के लिए अधिकृत नहीं हैं.