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Health Alert: गले की इन समस्याओं को न करें नजरअंदाज, कैंसर के हो सकते हैं शुरुआती संकेत

Varsha Varma CE
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Health Alert: गले की इन समस्याओं को न करें नजरअंदाज, कैंसर के हो सकते हैं शुरुआती संकेत

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): क्या आपके गले में बार-बार खराश होती है, क्या खाना निगलने या पानी पीने में आपको परेशानी होती है, अगर हां, तो इसे केवल मौसम में बदलाव समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि गले से जुड़ी कुछ सामान्य दिखने वाली समस्याएं कई बार गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती हैं. यहां तक कि लगातार बने रहने वाले ये लक्षण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं.

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) अब केवल महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर तक सीमित नहीं रह गया है. हाल के सालों में यह वायरस गले के कैंसर और खासकर ओरोफैरिंजियल कैंसर का एक बड़ा कारण बनकर सामने आया है. यह कैंसर टॉन्सिल और जीभ के पिछले हिस्से को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है. एचपीवी दुनिया के सबसे आम वायरल संक्रमणों में से एक है. अधिकांश लोगों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इस वायरस को खत्म कर देती है, लेकिन कुछ मामलों में यह वायरस लंबे समय तक शरीर में सक्रिय बना रहता है. यही संक्रमण बाद में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है.

सबसे चिंता की बात यह है कि अब ऐसे युवाओं में भी गले के कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया और न ही शराब का सेवन किया है. इससे यह साफ होता है कि केवल तंबाकू और शराब ही गले के कैंसर के कारण नहीं हैं, बल्कि एचपीवी संक्रमण भी एक बड़ा जोखिम बन सकता है.शुरुआती में इस कैंसर के लक्षण बेहद सामान्य दिखाई देते हैं. यही कारण है कि लोग समय पर जांच नहीं कराते और नजंरअंदाज कर देते है जिससे यह बीमारी एक गंभीर रुप ले लेती है. यदि गले में लगातार खराश बनी रहती है, निगलने में परेशानी होती है, गर्दन में गांठ महसूस होती है, आवाज में बदलाव आता है, गले में कुछ फंसा हुआ सा लगता है या लंबे समय तक दर्द बना रहता है, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए.

बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो उपचार काफी प्रभावी हो सकता है. समय पर जांच और सही इलाज से मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचपीवी संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं. यह वैक्सीन उन एचपीवी प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करती है जो कैंसर का कारण बन सकते हैं. 9 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को इसकी दो डोज दी जाती हैं, जबकि 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को तीन डोज की आवश्यकता होती है. यह वैक्सीन लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए समान रूप से लाभकारी मानी जाती है.

सही जागरूकता, समय पर जांच और एचपीवी वैक्सीनेशन के जरिए गले के कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसलिए शरीर के किसी भी असामान्य संकेत को हल्के में न लें और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.