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कंसीव करने में बढ़ता वजन बन रहा बड़ी बाधा! जानिए कैसे महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी पर पड़ रहा असर

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
कंसीव करने में बढ़ता वजन बन रहा बड़ी बाधा! जानिए कैसे महिलाओं और पुरुषों दोनों की फर्टिलिटी पर पड़ रहा असर

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो चुका है. अक्सर लोग इसे सिर्फ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारियों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बढ़ता वजन आपकी पैरेंट बनने की उम्मीदों पर भी असर डाल सकता है. अगर कोई दंपति लंबे समय से संतान सुख का इंतजार कर रहा है, तो इसकी एक वजह मोटापा भी हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक वजन महिलाओं और पुरुषों दोनों की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को प्रभावित करता है. हालांकि राहत की बात यह है कि समय रहते जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव कर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

महिलाओं की फर्टिलिटी पर कैसे असर डालता है मोटापा?

विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में अत्यधिक चर्बी हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकती है. इसका सीधा असर ओव्यूलेशन की प्रक्रिया पर पड़ता है. कई मामलों में ओव्यूलेशन अनियमित हो जाता है या पूरी तरह बंद भी हो सकता है. यही वजह है कि गर्भधारण करने में कठिनाई आने लगती है. मोटापा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी समस्या से भी जुड़ा हुआ माना जाता है. यह महिलाओं में बांझपन के प्रमुख कारणों में शामिल है. विशेषज्ञों के अनुसार, जिन महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अधिक होता है, उन्हें प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में अधिक समय लग सकता है. इतना ही नहीं, IVF जैसे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सफलता दर भी अधिक वजन की वजह से प्रभावित हो सकती है.

पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी होती है प्रभावित

अक्सर माना जाता है कि फर्टिलिटी की समस्या केवल महिलाओं से जुड़ी होती है, लेकिन ऐसा नहीं है. पुरुषों में भी मोटापा प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है. अतिरिक्त वजन टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के स्तर को कम कर सकता है, जिससे स्पर्म काउंट, स्पर्म की गुणवत्ता और उनकी गतिशीलता (Motility) पर नकारात्मक असर पड़ता है. यदि मोटापे के साथ खराब खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान या तनाव जैसी समस्याएं भी जुड़ जाएं, तो गर्भधारण की संभावना और कम हो सकती है.

डॉक्टरों का कहना है कि फर्टिलिटी सुधारने के लिए बहुत अधिक वजन कम करना जरूरी नहीं है. कई अध्ययनों में पाया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने कुल वजन का केवल 5 से 10 प्रतिशत भी कम कर ले, तो हार्मोनल संतुलन बेहतर हो सकता है और प्रजनन क्षमता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इसके लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव पर नियंत्रण बेहद जरूरी माना जाता है. प्रेग्नेंसी की योजना बनाने से पहले स्वस्थ वजन बनाए रखना मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है.

फर्टिलिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ कुछ आसान लेकिन प्रभावी उपाय अपनाने की सलाह देते हैं
•    संतुलित और पौष्टिक आहार लें.
•    रोजाना कम से कम 30–45 मिनट व्यायाम करें.
•    पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लें.
•    तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें.
•    धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से दूरी बनाए रखें.
•    गर्भधारण की योजना से पहले डॉक्टर से स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं.

भारत में मोटापे के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इसके साथ ही फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं. यह केवल गर्भधारण तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है. इसलिए यदि आप भविष्य में माता-पिता बनने की योजना बना रहे हैं, तो स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है. सही समय पर उठाया गया एक छोटा कदम आपके माता-पिता बनने के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभा सकता है.