TNP DESK: मसूड़ों में सूजन, दर्द या मुंह में छाले जैसी समस्याएं अक्सर लोगों को परेशान करती हैं. अधिकांश मामलों में ये सामान्य कारणों से होती हैं और कुछ दिनों में ठीक भी हो जाती हैं. लेकिन यदि ये परेशानियां लगातार बनी रहें या बार-बार दोहराई जाएं, तो इन्हें हल्के में लेना ठीक नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार ऐसे लक्षण ओरल कैंसर की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं.
मसूड़ों की सूजन का सबसे बड़ा कारण दांतों की ठीक तरह से सफाई न होना है. दांतों पर प्लाक और टार्टर जमा होने से मसूड़ों में संक्रमण शुरू हो सकता है. इसके अलावा धूम्रपान, मधुमेह, हार्मोनल बदलाव, पोषक तत्वों की कमी, कुछ दवाओं का असर और बैक्टीरियल संक्रमण भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं. यदि समय पर इलाज नहीं कराया जाए तो संक्रमण गहराता जाता है और मसूड़ों के साथ दांतों को सहारा देने वाली हड्डियां भी प्रभावित हो सकती हैं.
मुंह के छालों के पीछे भी कई कारण हो सकते हैं. मुंह के अंदर चोट लगना, मानसिक तनाव, पर्याप्त नींद की कमी, पाचन संबंधी गड़बड़ी, विटामिन बी-12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी, अत्यधिक मसालेदार या खट्टा भोजन और कुछ बीमारियां इसकी वजह बन सकती हैं. आमतौर पर ऐसे छाले एक से दो सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं.
हालांकि यदि मुंह का कोई घाव या छाला दो से तीन सप्ताह बाद भी ठीक नहीं हो रहा हो, मसूड़ों, जीभ या गाल के अंदर लगातार सूजन या गांठ महसूस हो, लाल या सफेद रंग के धब्बे लंबे समय तक बने रहें, चबाने, निगलने या बोलने में परेशानी होने लगे, बिना किसी कारण दांत हिलने लगें, गर्दन में गांठ महसूस हो या तेजी से वजन कम होने लगे, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. ये लक्षण ओरल कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं.
विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआती चरण में ओरल कैंसर का घाव सामान्य छाले जैसा दिखाई दे सकता है. इसलिए केवल देखकर दोनों में अंतर कर पाना आसान नहीं होता. समय पर जांच और उपचार से बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है और इलाज की सफलता की संभावना भी बढ़ जाती है.
ओरल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए दिन में दो बार ब्रश करना, नियमित रूप से फ्लॉस का उपयोग करना, तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाना, संतुलित एवं पौष्टिक भोजन लेना और समय-समय पर दंत चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है. छोटी-सी लापरवाही भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है, इसलिए मुंह से जुड़े किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
