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पैरों में सूजन: कहीं दिल या किडनी की खराबी का संकेत तो नहीं? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Rashmi Prasad CE
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पैरों में सूजन: कहीं दिल या किडनी की खराबी का संकेत तो नहीं? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आजकल रोजमर्रा की ज़िंदगी में कई लोगों के काम खड़े खड़े ही अक्सर हुआ करते है जैसे किचन के काम अक्सर लंबे समय तक खड़े रहने या सफर करने के बाद पैरों में हल्की सूजन आना आम बात है, जिसे हम नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अगर आपके पैरों में लगातार सूजन बनी हुई है, त्वचा को दबाने पर वहां गड्ढा (Pitting) बन जाता है, या इसके साथ ही आपको थकान और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो यह कोई सामान्य बात नहीं है. मेडिकल भाषा में पैरों की सूजन को एडिमा (Edema) कहा जाता है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, पैरों में दिखने वाली सूजन आपके शरीर के दो सबसे महत्वपूर्ण अंगों यानी  दिल और किडनी की कार्यप्रणाली में आई खराबी का एक बड़ा चेतावनी संकेत हो सकती है.

  1. किडनी की बीमारी और पैरों में सूजन का संबंध

हमारी किड़नियां शरीर में एक फिल्टर की तरह काम करती हैं, जो खून से अपशिष्ट पदार्थों (Tastes) और अतिरिक्त पानी व सोडियम को छानकर पेशाब के रास्ते बाहर निकालती हैं. जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है.

  • सोडियम और फ्लूइड रिटेंशन: एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो वह शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी को बाहर नहीं निकाल पाती. यह एक्स्ट्रा फ्लूइड गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण शरीर के निचले हिस्सों, विशेषकर टखनों (Ankles) और पैरों में जमा होने लगता है.
  • एल्ब्यूमिन प्रोटीन की कमी: किडनी की बीमारी (जैसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम) में फिल्टर खराब होने के कारण यूरिन के रास्ते 'एल्ब्यूमिन' नामक जरूरी प्रोटीन बाहर निकलने लगता है. खून में प्रोटीन की कमी होने से रक्त वाहिकाओं से पानी लीक होकर आसपास के टिश्यूज में जमा होने लगता है, जिससे पैरों के साथ-साथ आंखों के आसपास और चेहरे पर भी सूजन दिखने लगती है.
  1. दिल की कमजोरी (Heart Failure) से कैसे आती है सूजन?

हार्ट फेलियर या दिल की कमजोरी का मतलब यह नहीं है कि दिल ने काम करना बंद कर दिया है, बल्कि इसका अर्थ है कि दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक खून को पंप करने में असमर्थ है.

  • खून का धीमा बहाव: कार्डियोलॉजिस्ट्स (दिल के डॉक्टरों) के अनुसार, जब दिल की पंपिंग क्षमता कमजोर हो जाती है, तो पैरों और निचले अंगों से खून वापस दिल की तरफ पूरी रफ्तार से नहीं पहुंच पाता. इसके कारण पैरों की नसों में दबाव बढ़ जाता है और फ्लूइड (तरल पदार्थ) रिसकर पैरों के टिश्यूज में इकट्ठा हो जाता है.
  • कंजस्टिव हार्ट फेलियर (CHF): इस स्थिति में सूजन आमतौर पर दोनों पैरों में एक साथ होती है और शाम के समय या दिनभर खड़े रहने के बाद और ज्यादा बढ़ जाती है.

किडनी और हार्ट की सूजन में अंतर कैसे पहचानें?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों अंगों की खराबी से होने वाली सूजन के लक्षणों में थोड़ा अंतर होता है, जिसे समझकर आप सही डॉक्टर के पास जा सकते हैं:

अंग (Organ)

सूजन के मुख्य लक्षण और पहचान

किडनी की खराबी

पैरों के साथ-साथ सुबह सोकर उठने पर चेहरे और आंखों के नीचे (Puffy Eyes) सूजन दिखाई देती है. पेशाब में झाग आना या यूरिन की मात्रा कम होना इसके अन्य लक्षण हैं.

दिल की बीमारी

सूजन मुख्य रूप से केवल पैरों और टखनों में होती है. इसके साथ ही थोड़ा सा चलने पर सांस फूलना, लेटने पर खांसी आना या बेचैनी होना और अत्यधिक थकान होना इसके प्रमुख लक्षण हैं.

पैरों की सूजन को कभी भी घरेलू नुस्खे आजमाकर टालने की भूल न करें. यह आपके शरीर के भीतर पनप रही किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती अलार्म हो सकता है. डॉक्टर इसके सटीक कारण का पता लगाने के लिए किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT), क्रिएटिनिन टेस्ट, यूरिन टेस्ट, इकोकार्डियोग्राम (ECHO) और चेस्ट एक्स-रे जैसी जांचें करवाते हैं. सही समय पर सही इलाज और नमक के सेवन को नियंत्रित करके इस समस्या को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है.