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इन राज्य में सिर्फ लड़का-लड़की नहीं, मेंढक-मेंढकी की भी कराई जाती है शादी, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा

Priyanka Kumari CE
Sr. Content Writer
इन राज्य में सिर्फ लड़का-लड़की नहीं, मेंढक-मेंढकी की भी कराई जाती है शादी, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):हमारा देश भारत विभिन्न संस्कृति और परंपराओं का देश है, जहां हर राज्य, जिला, कस्बे और गांव की अपनी अलग-अलग परंपराएं है. आज हम भारत के ऐसे अनोखी शादी के बारे में बात करने वाले है, जहां मेंढक-मेंढकी की शादी पूरे रीति-रिवाज के साथ कराई जाती है.इसके पीछे की वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.यह एक बेहद रोचक परंपरा है.जहां मेंढक-मेंढकी की शादी ग्रामीण लोग खासतौर पर तब कराते है, जब कम बारिश होती है.

काफी पुरानी है परंपरा

यह सुनने में भले ही अटपटा या अजीब लगे, लेकिन यह पूरी तरह से सच है. यहां के लोगों का मानना है कि जब समय पर मानसून नहीं आता या बहुत कम वर्षा होती है, तो इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए मेंढक-मेंढकी की शादी कराई जाती है.यह शादी मजाकिया तौर पर नहीं, बल्कि पूरे रीति-रिवाज, बैंड-बाजा और बारात के साथ धूमधाम से संपन्न कराई जाती है.यहां के लोगों का मानना है कि जब मेंढक टर्र-टर्र करते हैं या उनकी शादी होती है, तो इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं, जिससे अच्छी वर्षा होती है और खेती भी अच्छी होती है. मेंढक-मेंढकी की शादी से जुड़ी यह परंपरा सदियों पुरानी है. यहां के लोगों का कहना है कि उनके पूर्वज भी जब समय पर बारिश नहीं होती थी, तो यही तरीका अपनाते थे, जिसके बाद अच्छी वर्षा होती थी.

आज भी जीवित है परंपरा

सबसे अच्छी बात यह है कि यहां के लोग आज भी इस परंपरा को जीवित रखे हुए है और पूरे उत्साह के साथ इसे निभाते है. आज भले ही हमारा देश चांद पर पहुंच चुका है और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ गया है, लेकिन ऐसे समय में अपनी मान्यताओं और परंपराओं को जीवित रखना अपने आप में बेहद खास और सराहनीय है.आपको बता दें कि मेंढक-मेंढकी की शादी का उद्देश्य किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देना बिल्कुल भी नहीं है. इसका मुख्य उद्देश्य पूरे समुदाय को एकजुट होकर इस आयोजन में शामिल करना है. वहीं, यह परंपरा प्रकृति के प्रति सम्मान को भी दर्शाती है. जब इस तरह का आयोजन होता है, तो पूरे गांव के लोग एकजुट होकर आपसी सहमति से इसे धूमधाम से संपन्न कराते है. इसके साथ ही मेंढक-मेंढकी की शादी जीव-जंतुओं और प्रकृति के साथ इंसान के गहरे जुड़ाव को भी दर्शाती है.लोग अच्छी बारिश होने पर इसे अपनी आस्था से जोड़कर देखते है.

इन राज्यों के लोग धूम धाम से करते है मेंढक-मेंढकी की शादी

आपको बता दें कि यह परंपरा सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि ओडिशा, झारखंड, असम, मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में भी निभाई जाती है. हालांकि, हर जगह की मान्यताएं और रस्में अलग-अलग हो सकती है.