टिएनपी डेस्क(TNP DESK): बॉलीवुड दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री में से एक है. हर साल यहां सैकड़ों फिल्में बनती हैं, लेकिन दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार ऑस्कर तक पहुंचना किसी भी फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. भारतीय सिनेमा का ऑस्कर से रिश्ता काफी पुराना है. कई भारतीय फिल्मों को ऑस्कर के लिए देश की ओर से भेजा गया, लेकिन बहुत कम फिल्में अंतिम नॉमिनेशन तक पहुंच सकीं.
हिंदी सिनेमा की बात करें तो मदर इंडिया, सलाम बॉम्बे और लगान जैसी फिल्मों ने ऑस्कर के अंतिम नॉमिनेशन में जगह बनाई. इसके अलावा कुछ ऐसी फिल्में भी रही हैं, जिनका बॉलीवुड से गहरा संबंध रहा और उन्हें अलग-अलग कैटेगरी में ऑस्कर नॉमिनेशन मिला.
मदर इंडिया ने पहली बार रचा इतिहास
साल 1957 में रिलीज हुई 'मदर इंडिया' भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल है. महबूब खान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नरगिस, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राज कुमार ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं.
'मदर इंडिया' ऑस्कर में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेशन हासिल करने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी. फिल्म एक ग्रामीण महिला के संघर्ष, गरीबी और सामाजिक परिस्थितियों की कहानी दिखाती है. यह फिल्म ऑस्कर जीतने के बेहद करीब पहुंची, लेकिन पुरस्कार हासिल नहीं कर सकी.
सलाम बॉम्बे को मिला ऑस्कर नॉमिनेशन
मीरा नायर के निर्देशन में बनी 'सलाम बॉम्बे' 1988 में रिलीज हुई थी. फिल्म ने मुंबई की सड़कों पर जिंदगी गुजारने वाले बच्चों की कठिन परिस्थितियों को पर्दे पर दिखाया.
इस फिल्म को 61वें अकादमी अवॉर्ड्स में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म के लिए नॉमिनेट किया गया था. फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा की अलग पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
लगान ने दुनियाभर में बटोरी सुर्खियां
आमिर खान की 'लगान' ऑस्कर तक पहुंचने वाली सबसे चर्चित हिंदी फिल्मों में से एक है. आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 2001 में रिलीज हुई थी.
ब्रिटिश शासन के समय की कहानी पर आधारित फिल्म में क्रिकेट को बेहद दिलचस्प तरीके से दिखाया गया. 'लगान' को 74वें अकादमी अवॉर्ड्स में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला. हालांकि फिल्म पुरस्कार नहीं जीत सकी. आमिर खान की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का ध्यान भारतीय सिनेमा की ओर खींचा.
रंग दे बसंती और तारे जमीन पर भी ऑस्कर की रेस में
'रंग दे बसंती', 'तारे जमीन पर', 'बर्फी', 'गली बॉय' और कई दूसरी बॉलीवुड फिल्मों को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए आधिकारिक एंट्री के रूप में भेजा गया था. हालांकि ये फिल्में अंतिम पांच नॉमिनेशन में जगह नहीं बना सकीं. इसलिए इन्हें ऑस्कर नॉमिनेटेड फिल्म कहना सही नहीं होगा.
बॉलीवुड से जुड़े कलाकारों ने भी बनाई जगह
भारतीय सिनेमा से जुड़े कलाकारों ने भी ऑस्कर में अपनी पहचान बनाई है. 2008 की फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' का भारत और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से गहरा जुड़ाव था. एआर रहमान को इस फिल्म के संगीत के लिए ऑस्कर नॉमिनेशन मिला और उन्होंने दो पुरस्कार जीतकर इतिहास रचा. गीतकार गुलजार ने भी 'जय हो' के लिए ऑस्कर जीता. रसूल पुकुट्टी को फिल्म के साउंड मिक्सिंग के लिए ऑस्कर मिला.
भारतीय और हिंदी सिनेमा का ऑस्कर सफर भले ही सीमित नॉमिनेशन वाला रहा हो, लेकिन मदर इंडिया से लेकर लगान तक इन फिल्मों ने साबित किया कि भारतीय कहानियां दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंच पर भी अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं.