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ENTERTAINMENT

'The Vvan: Force of the Forest' Review: सिद्धार्थ-तमन्ना की फिल्म में हॉरर कम, रहस्य और लोककथा का रोमांच ज्यादा

Saumya Shukla
Saumya Shukla
Reporter | Copy Editor

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म 'द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. फिल्म की कहानी बिहार की लोककथाओं, रहस्यमयी जंगल, वन देवी की मान्यता और छठ जैसे स्थानीय रंगों को एक हॉरर कहानी के साथ जोड़ती है. कहानी सातवीं शताब्दी से शुरू होती है और फिर सीधे 2026 के दौर में पहुंच जाती है. ऐसे में फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका रहस्य और माहौल है. लेकिन सवाल यही है कि क्या यह फिल्म दर्शकों को सच में डराती है या फिर सिर्फ यह जानने की उत्सुकता बनाए रखती है कि आगे क्या होगा?

कहानी में क्या है खास?

फिल्म की कहानी देवांचल नाम के जंगल के आसपास घूमती है. इस जंगल को लेकर गांव में एक पुरानी मान्यता है कि सूरज ढलने के बाद वहां जाना खतरनाक है. जंगल के बीच वन देवी का मंदिर भी है, जिसे लेकर कई तरह की कहानियां पीढ़ियों से चली आ रही हैं.

कहानी की शुरुआत पुराने दौर से होती है. देवांचल के राजा को एक ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते उसे रात में जंगल के अंदर जाना पड़ता है. इसके बाद जो घटनाएं होती हैं, वही फिल्म के आगे के रहस्य की नींव बनती हैं.

कहानी फिर कई सदियों का सफर तय करते हुए 2026 में पहुंचती है. यहां सिद्धार्थ मल्होत्रा का किरदार ऋषि सामने आता है. वह इन पुरानी मान्यताओं और अंधविश्वासों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेता. लेकिन जब उसका सामना उसी जंगल और उससे जुड़े रहस्य से होता है, तो उसकी सोच बदलने लगती है.

बिहार का लोक रंग फिल्म को देता है अलग पहचान

फिल्म की खास बात इसका माहौल है. बिहार के गांव, स्थानीय परंपराएं, मंदिर, छठ और जंगल से जुड़ी मान्यताओं को कहानी में जगह दी गई है. इससे फिल्म को एक अलग तरह का लोकल रंग मिलता है.

फिल्म शुरुआत में धीरे-धीरे अपना माहौल तैयार करती है. जंगल को लेकर लोगों का डर, पुरानी कहानी और वर्तमान समय के किरदारों के बीच कनेक्शन देखने में दिलचस्प लगता है. स्क्रीन पर जंगल के दृश्य भी फिल्म की दुनिया को मजबूत बनाने में मदद करते हैं.

पहला हाफ बेहतर, दूसरे हिस्से में थोड़ी कमजोरी

फिल्म का पहला हिस्सा ज्यादा बेहतर तरीके से कहानी को आगे बढ़ाता है. ऋषि की गांव वापसी, जमीन से जुड़ा विवाद और जंगल का रहस्य धीरे-धीरे सामने आता है. इससे दर्शक के मन में यह सवाल बना रहता है कि आखिर जंगल के पीछे का सच क्या है.

लेकिन इंटरवल के बाद कहानी में कई चीजें एक साथ आने लगती हैं. आस्था, लालच, जंगल बचाने की बात, विकास और पुरानी मान्यताओं जैसे मुद्दे कहानी का हिस्सा बनते हैं. समस्या यह है कि इन सभी चीजों को जोड़ने की कोशिश में कहानी कुछ जगह थोड़ी बिखरी हुई लगती है.

वन देवी, रहस्यमयी ताकत और जादुई बाघ जैसे हिस्से देखने में आकर्षक हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल कुछ जगह जल्दी-जल्दी किया गया लगता है. इससे कहानी का असर उतना मजबूत नहीं रह पाता.

हॉरर कम, रहस्य और रोमांच ज्यादा

अगर आप फिल्म से बहुत ज्यादा डरावने सीन और लगातार हॉरर की उम्मीद कर रहे हैं, तो शायद आपको यह फिल्म उस स्तर तक डराती हुई नजर नहीं आएगी. फिल्म का फोकस डर पैदा करने से ज्यादा रहस्य बनाए रखने पर है.

कुल मिलाकर 'द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' की सबसे बड़ी ताकत इसकी लोककथा, जंगल का माहौल और रहस्यमयी कहानी है. फिल्म कुछ हिस्सों में अच्छी पकड़ बनाती है, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी और ज्यादा कसावट मांगती थी. सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की मौजूदगी के साथ फिल्म एक अलग तरह की हॉरर-एडवेंचर दुनिया बनाने की कोशिश करती है. यह फिल्म उन दर्शकों को ज्यादा पसंद आ सकती है जिन्हें डर से ज्यादा रहस्य, लोककथा और जंगल की कहानियां देखने में दिलचस्पी है.