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जिस गाने पर लगना था बैन, वही बन गया सुपरहिट! 66 साल पहले रेडियो की एक गलती ने बदल दिया इतिहास

Saumya Shukla
Senior News Publisher • TheNewsPost.in
जिस गाने पर लगना था बैन, वही बन गया सुपरहिट! 66 साल पहले रेडियो की एक गलती ने बदल दिया इतिहास

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे किस्से हैं, जो समय बीतने के बाद भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं. ऐसा ही एक दिलचस्प मामला भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर से जुड़ा है. करीब 66 साल पहले एक गाने को रेडियो पर बैन करने का फैसला लिया गया था, लेकिन एक छोटी सी गलती ने पूरा मामला बदल दिया. नतीजा यह हुआ कि जिस गाने पर रोक लगनी थी, वही पूरे देश में खूब बजा और सुपरहिट बन गया.

यह किस्सा साल 1960 में रिलीज हुई फिल्म 'दिल अपना और प्रीत पराई' का है. इस फिल्म में राज कुमार और मीना कुमारी मुख्य भूमिका में थे. फिल्म का निर्देशन किशोर साहू ने किया था, जबकि इसके लगभग सभी गानों को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी. फिल्म का संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था और गीत हसरत जयपुरी ने लिखे थे. फिल्म के लगभग सभी गाने दर्शकों को पसंद आए, लेकिन एक गाना अलग ही वजह से सुर्खियों में आ गया.

गाने के बोल पर हुआ था विवाद

फिल्म का गीत 'शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो' उस समय विवादों में आ गया था. यह गाना मीना कुमारी पर फिल्माया गया था. समुद्र किनारे फिल्माए गए इस गीत के बोल रेडियो सेंसर बोर्ड को आपत्तिजनक लगे. इसी वजह से फैसला लिया गया कि इस गाने का रेडियो पर प्रसारण नहीं किया जाएगा.

उस दौर में रेडियो ही मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम था. लोग नए फिल्मी गाने सुनने के लिए रेडियो पर ही निर्भर रहते थे. ऐसे में किसी गाने पर प्रतिबंध लगना बड़ी बात मानी जाती थी.

एक कर्मचारी की गलती ने बदल दी कहानी

रेडियो स्टेशन में जिस गाने पर रोक लगाई जाती थी, उसके रिकॉर्ड पर 'अस्वीकृत' का लेबल लगा दिया जाता था, ताकि उसे प्रसारित न किया जाए. लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान एक कर्मचारी से बड़ी गलती हो गई. उसने प्रतिबंधित किए जाने वाले 'शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो' की जगह लता मंगेशकर के मशहूर गीत 'अजीब दास्तां है ये' पर 'अस्वीकृत' का लेबल लगा दिया.

इस गलती के कारण 'अजीब दास्तां है ये' कुछ समय के लिए रेडियो से गायब हो गया, जबकि 'शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो' लगातार रेडियो पर बजता रहा. लोगों ने इस गाने को खूब पसंद किया और यह देखते ही देखते देशभर में लोकप्रिय हो गया.

बाद में सुधारी गई गलती

कुछ समय बाद वरिष्ठ अधिकारियों को रिकॉर्ड की जांच के दौरान इस गलती का पता चला. इसके बाद रिकॉर्ड को ठीक किया गया और सही गाने पर प्रतिबंध लगाया गया. हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी. जिस गीत को रेडियो पर नहीं बजना था, वह पहले ही लोगों के दिलों तक पहुंच चुका था.

आज भी याद किया जाता है यह किस्सा

फिल्म 'दिल अपना और प्रीत पराई' के गाने आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद हैं. खासकर 'अजीब दास्तां है ये' और 'शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो' आज भी पुराने गीतों की सूची में शामिल हैं. रेडियो की एक छोटी सी प्रशासनिक गलती ने इस घटना को हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास का यादगार किस्सा बना दिया. यह कहानी बताती है कि कभी-कभी एक मामूली भूल भी इतिहास में अपनी अलग पहचान छोड़ जाती है.