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आखिर क्यों इतना टफ माना जाता है CA का एग्जाम कि लोगों के छूट जाते हैं पसीने

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देश में कई ऐसी प्रतियोगी परीक्षाएं हैं जिसके पीछे अभ्यर्थियों की होड देखने को मिलती है. फिर चाहे वो डॉक्टर हो, इंजीनियरिंग की फील्ड हो या कैट, गेट, क्लैट जैसी जटिल परीक्षाएँ हों. पर CA यानि की चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा इन सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे ज्यादा कठिन मानी जाती है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है की आखिर CA की परीक्षा इतनी टफ क्यों होती है? आखिर क्यों इस परीक्षा के लिए लोग कई अटेम्पट तक ले लेते हैं और फिर भी इस परीक्षा की जटिलता को देखकर लोगों के पसीने तक छूट जाते हैं. 

दरअसल चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी CA की परीक्षा को सबसे चुनौतीपूर्ण प्रोफेशनल परीक्षाओं में गिना जाता है. हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी CA बनने का सपना लेकर परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता हासिल करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. यही वजह है कि कई उम्मीदवारों को CA की परीक्षा पास करने में एक से ज्यादा अटेम्प्ट लग जाते हैं. लेकिन सवाल यह है कि आखिर CA परीक्षा इतनी कठिन क्यों है? क्या सिर्फ कम पासिंग प्रतिशत इसकी वजह है या इसके पीछे कुछ और कारण भी हैं? साथ ही, CA बनने के लिए योग्यता क्या होनी चाहिए, इसकी तैयारी कैसे करनी चाहिए और उम्मीदवार कितने अटेम्प्ट दे सकते हैं, आइए जानते हैं.

CA बनने के लिए उम्मीदवार को चार्टर्ड अकाउंटेंसी के निर्धारित चरणों को पूरा करना होता है. 12वीं कक्षा के बाद विद्यार्थी CA Foundation के जरिए इस कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं. वहीं ग्रेजुएशन के बाद पात्र उम्मीदवारों के लिए Direct Entry का विकल्प भी उपलब्ध होता है, जिसके तहत निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले विद्यार्थी आगे की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं. CA बनने की राह में मुख्य रूप से CA Foundation, CA Intermediate और CA Final जैसे चरणों से गुजरना होता है. इसके साथ ही उम्मीदवार को निर्धारित प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और अन्य जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं. यानी सिर्फ परीक्षा पास करना ही CA बनने के लिए पर्याप्त नहीं है.

CA की परीक्षा इतनी कठिन क्यों होती है?
CA की पढ़ाई का दायरा काफी बड़ा है. इसमें अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, कॉरपोरेट लॉ, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्सेशन, कॉस्टिंग और फाइनेंशियल मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल होते हैं. हर विषय में अलग-अलग नियम और उनका व्यावहारिक इस्तेमाल समझना जरूरी होता है. इसके अलावा टैक्स और कॉरपोरेट कानूनों में समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं. GST, कंपनी कानून और अकाउंटिंग स्टैंडर्ड में होने वाले संशोधनों को भी विद्यार्थियों को अपनी तैयारी में शामिल करना पड़ता है. इसलिए CA की तैयारी में केवल पुरानी किताबें पढ़ लेना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सिलेबस और लागू नियमों में होने वाले बदलावों पर भी नजर रखनी पड़ती है.

CA परीक्षा की एक बड़ी चुनौती इसका पासिंग क्राइटेरिया है. उम्मीदवारों को संबंधित नियमों के अनुसार प्रत्येक पेपर में न्यूनतम अंक हासिल करने के साथ ग्रुप स्तर पर भी निर्धारित कुल अंक प्राप्त करने होते हैं. इसलिए किसी एक विषय में अच्छे अंक हासिल करना पर्याप्त नहीं होता. सभी विषयों में संतुलित तैयारी करना जरूरी होता है. यही वजह है कि कई बार किसी छात्र की एक या दो विषयों में अच्छी पकड़ होने के बावजूद बाकी पेपरों में कमजोर प्रदर्शन उसके परिणाम को प्रभावित कर सकता है.

CA बनने की राह में परीक्षा के अलावा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग यानी आर्टिकलशिप भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस दौरान विद्यार्थियों को अकाउंटिंग, ऑडिट और दूसरे पेशेवर कामों का व्यावहारिक अनुभव मिलता है. सबसे बड़ी चुनौती तब आती है, जब विद्यार्थी ट्रेनिंग और परीक्षा की तैयारी को एक साथ संभालता है. दिन का बड़ा हिस्सा काम या ट्रेनिंग में निकलने के बाद पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं होता. ऐसे में टाइम मैनेजमेंट और अनुशासन बेहद जरूरी हो जाता है.

CA की तैयारी कैसे करनी चाहिए?
CA की तैयारी के लिए सबसे जरूरी चीज है सही रणनीति और निरंतरता. उम्मीदवारों को शुरुआत में पूरे सिलेबस को समझकर एक व्यावहारिक स्टडी प्लान बनाना चाहिए. किसी एक विषय को लगातार पढ़ने के बजाय सभी विषयों को पर्याप्त समय देना ज्यादा प्रभावी रहता है.
तैयारी के दौरान इन बातों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है:
•    सबसे पहले पूरे सिलेबस और एग्जाम पैटर्न को समझें.
•    अपने कमजोर और मजबूत विषयों की पहचान करें.
•    रोजाना पढ़ाई के लिए निश्चित समय तय करें.
•    कॉन्सेप्ट समझने के बाद सवालों की लगातार प्रैक्टिस करें.
•    पुराने प्रश्नपत्र और मॉक टेस्ट जरूर हल करें.
•    परीक्षा से पहले कई बार रिवीजन करें.
•    टैक्स और कानून जैसे बदलते विषयों में लेटेस्ट अपडेट पर ध्यान दें.
•    मॉक टेस्ट के जरिए समय प्रबंधन की आदत विकसित करें.
•    आर्टिकलशिप और पढ़ाई के बीच संतुलित टाइमटेबल बनाएं.