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झारखंड में कितने निजी मेडिकल कॉलेज हैं? जानिए सीट, सुविधाएं और नीट रैंक के आधार पर दाखिले की पूरी जानकारी

Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अगर आप झारखंड में एमबीबीएस करना चाहते हैं और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ निजी कॉलेजों का विकल्प भी देख रहे हैं, तो यह खबर आपके बड़े काम की है. नीट यूजी 2026 के लिए झारखंड में निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 400 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी एनएमसी के 2026 के सीट आंकड़ों के अनुसार राज्य में निजी क्षेत्र की कुल 400 एमबीबीएस सीटें हैं. 2026 में उपलब्ध एनएमसी के रिकॉर्ड के अनुसार झारखंड में दो सामान्य निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 200 सीटें और एक डीम्ड विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज में 200 सीटें हैं. इसलिए दाखिले से पहले कॉलेज की श्रेणी को समझना जरूरी है.

झारखंड के प्रमुख निजी मेडिकल कॉलेज
•    लक्ष्मी चंद्रवंशी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, विश्रामपुर, पलामू – 100 एमबीबीएस सीट 
•    नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सरायकेला – 100 एमबीबीएस सीट 
•    मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर – 200 एमबीबीएस सीट, डीम्ड विश्वविद्यालय श्रेणी 

कॉलेजों में कैसी हैं सुविधाएं?
निजी मेडिकल कॉलेज चुनते समय सिर्फ सीटों की संख्या या कॉलेज के नाम को नहीं देखना चाहिए. सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि कॉलेज को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की मान्यता प्राप्त है या नहीं. इसके अलावा कॉलेज में शिक्षण अस्पताल, बिस्तरों की संख्या, मरीजों की उपलब्धता, चिकित्सा प्रयोगशालाएं, व्याख्यान कक्ष, पुस्तकालय, छात्रावास और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं कैसी हैं, इसकी भी जानकारी लेनी चाहिए. एमबीबीएस की पढ़ाई में शिक्षण अस्पताल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. अस्पताल में आने वाले मरीजों के जरिए छात्रों को व्यावहारिक चिकित्सा प्रशिक्षण मिलता है. खासकर नए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने से पहले वहां उपलब्ध सुविधाओं और मान्यता की वर्तमान स्थिति की जांच करना जरूरी है.

निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिले की प्रक्रिया क्या है?
निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिले के लिए भी नीट यूजी परीक्षा में सफल होना अनिवार्य है. नीट में सफल होने के बाद छात्रों को काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होना पड़ता है. झारखंड में राज्य कोटे की काउंसलिंग झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद यानी जेसीईसीईबी की ओर से आयोजित की जाती है. नीट यूजी के आधार पर राज्य में मेधा सूची तैयार की जाती है और इसके बाद अलग-अलग चरणों में सीटों का आवंटन किया जाता है. वहीं डीम्ड विश्वविद्यालय की सीटों के लिए अलग काउंसलिंग व्यवस्था लागू होती है. इसलिए छात्रों को यह जरूर देखना चाहिए कि जिस मेडिकल कॉलेज में वे दाखिला लेना चाहते हैं, उसकी सीट राज्य कोटा, अखिल भारतीय कोटा या डीम्ड विश्वविद्यालय कोटा के तहत आती है.

नीट रैंक के आधार पर कैसे मिलेगा दाखिला?
निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए कोई एक निश्चित नीट रैंक तय नहीं होती. हर साल कटऑफ बदलती है. यह कॉलेज, छात्र की श्रेणी, कोटा, काउंसलिंग के चरण, उपलब्ध सीटों और छात्रों की पसंद पर निर्भर करता है. मसलन, किसी कॉलेज में पहले चरण में जिस रैंक पर आखिरी सीट मिली हो, जरूरी नहीं कि दूसरे चरण या अंतिम खाली सीट वाले चरण में भी वही रैंक रहे. अगर आपकी नीट रैंक सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए पर्याप्त नहीं है, तो आप काउंसलिंग के दौरान निजी मेडिकल कॉलेजों को अपनी पसंद में शामिल कर सकते हैं. हालांकि, रैंक के साथ कॉलेज की फीस, छात्रावास शुल्क और अन्य खर्चों की जानकारी लेना भी बेहद जरूरी है.

400 सीटों के लिए कितनी प्रतिस्पर्धा?
2026 में झारखंड में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को मिलाकर करीब 1,500 एमबीबीएस सीटें हैं. इनमें निजी क्षेत्र की 400 सीटें शामिल हैं. इसलिए निजी मेडिकल कॉलेज में भी दाखिला अपने आप नहीं मिल जाता. आपकी नीट रैंक जितनी बेहतर होगी, पसंदीदा कॉलेज मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी. सबसे जरूरी सलाह: सिर्फ यह देखकर कॉलेज का चुनाव न करें कि कितने अंकों या किस रैंक पर दाखिला मिल सकता है. अपनी नीट रैंक, श्रेणी, झारखंड का स्थानीय निवासी प्रमाण, कोटा, सालाना फीस, छात्रावास शुल्क और कॉलेज की मान्यता को ध्यान में रखकर पसंद की सूची तैयार करें. दाखिले से पहले जेसीईसीईबी की ओर से जारी सीट सूची और फीस से जुड़ी आधिकारिक सूचना को जरूर देखें.