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आखिर क्यों CBSE से छीनकर NTA को सौंपी गई थी JEE-NEET की जिम्मेदारी, जानिए पूरी कहानी

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
आखिर क्यों CBSE से छीनकर NTA को सौंपी गई थी JEE-NEET की जिम्मेदारी, जानिए पूरी कहानी

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 रद्द होने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है. 3 मई को आयोजित परीक्षा के पेपर लीक होने की खबर सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई, जिससे छात्रों का एक साल दांव पर लग गया. इस पूरे विवाद के बाद सबसे ज्यादा सवाल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर उठ रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर छात्र संगठनों तक, हर जगह यह चर्चा हो रही है कि आखिर जिस एजेंसी को देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं की जिम्मेदारी दी गई, वह बार-बार विवादों में क्यों घिर रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय NEET और JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं CBSE आयोजित करता था? फिर ऐसी क्या जरूरत पड़ी कि केंद्र सरकार को एक अलग परीक्षा एजेंसी बनानी पड़ी? आइए जानते हैं NTA के गठन की पूरी कहानी. 

क्यों बनाई गई थी NTA?
भारत में लंबे समय तक मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं का संचालन CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) करता था. लेकिन बोर्ड का मुख्य काम स्कूली शिक्षा और 10वीं-12वीं की परीक्षाओं का संचालन है. प्रवेश परीक्षाओं की बढ़ती संख्या और लाखों अभ्यर्थियों के दबाव के कारण CBSE पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने लगा था. 

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल की घटनाएं सामने आने लगीं. वर्ष 2015 में आयोजित AIPMT (जो बाद में NEET बना) पेपर लीक विवाद के कारण रद्द करनी पड़ी थी. इसके बाद 2018 में CBSE की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए. इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐसी संस्था बनाने का फैसला किया जो सिर्फ प्रवेश परीक्षाओं के संचालन पर फोकस करे. 

कब हुई NTA की शुरुआत?
केंद्र सरकार ने 2017-18 के बजट में एक स्वतंत्र परीक्षा एजेंसी बनाने की घोषणा की थी. इसके बाद नवंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के गठन को मंजूरी दी. NTA को सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में पंजीकृत किया गया. एजेंसी ने 2018 के अंत से राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं का संचालन शुरू किया और धीरे-धीरे JEE Main, NEET, UGC NET समेत कई बड़ी परीक्षाओं की जिम्मेदारी संभाल ली. 

कैसे काम करती है NTA?
NTA को तकनीक आधारित और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली विकसित करने के उद्देश्य से बनाया गया था. एजेंसी का नेतृत्व शिक्षा क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ करते हैं. इसके संचालन में IIT, IIM और प्रमुख विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद भी शामिल रहते हैं. एजेंसी की खासियत यह है कि अधिकांश परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित की जाती हैं. ग्रामीण और दूरदराज के छात्रों को डिजिटल परीक्षा प्रणाली से परिचित कराने के लिए देशभर में टेस्ट प्रैक्टिस सेंटर (TPC) भी बनाए गए हैं. NTA दावा करती है कि उसके प्रश्नपत्र विशेषज्ञों की निगरानी में तैयार किए जाते हैं. प्रश्नों का स्तर संतुलित रखने के लिए आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों और डेटा विश्लेषण का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण हो सके. 

NTA कौन-कौन सी परीक्षाएं कराता है?
वर्तमान में NTA देश की कई प्रमुख परीक्षाओं का संचालन करता है, जिनमें शामिल हैं—
•    NEET UG 
•    JEE Main 
•    CUET UG और PG 
•    UGC NET 
•    GPAT 
•    CMAT 
•    IGNOU प्रवेश परीक्षाएं 

अब फिर सवालों के घेरे में NTA
NTA को पारदर्शी और आधुनिक परीक्षा प्रणाली विकसित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन हाल के वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन और परिणाम संबंधी विवादों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. NEET UG 2026 रद्द होने के बाद छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाया जाए, ताकि लाखों युवाओं के भविष्य पर संकट न आए. ऐसे में आने वाले दिनों में NTA की भूमिका और उसकी विश्वसनीयता पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी.