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BREAKING: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की हुई दर्दनाक मौत

Shreya Upadhyay CE
Content Writer & Copy Editor
BREAKING: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की हुई दर्दनाक मौत

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया, जब बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का स्लैब अचानक भरभराकर गिर पड़ा. इस दर्दनाक घटना में 6 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर मलबे में दब गए. हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया. स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) की टीम ने करीब साढ़े सात घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला.

यह हादसा हमीरपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर ललपुरा क्षेत्र में देर रात करीब 2 बजे हुआ. जानकारी के मुताबिक, उस समय इलाके में तेज आंधी और बारिश हो रही थी. मौसम विभाग के अनुसार, हवा की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी. इसी दौरान पुल का भारी स्लैब टूटकर नीचे गिर गया. उत्तर प्रदेश ब्रिज कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक धर्मवीर सिंह ने बताया कि आंधी-तूफान की वजह से स्लैब कमजोर होकर गिरा और उसके नीचे सो रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए. हादसे के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सहायक अभियंता गजेंद्र कुमार चौधरी को निलंबित कर दिया है, जबकि परियोजना प्रबंधक दिलीप कुमार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.

प्रत्यक्षदर्शी मजदूर सुरेश कुमार ने बताया कि पुल निर्माण का कार्य दो शिफ्टों में चल रहा था. पहली शिफ्ट के मजदूर पुल के नीचे आराम कर रहे थे, जबकि दूसरी शिफ्ट के कुछ मजदूर ऊपर काम में लगे थे. अचानक तेज आंधी शुरू हुई तो मजदूर बचने के लिए पुल पर ही लेट गए. तभी अचानक स्लैब गिर गया और पूरा इलाका चीख-पुकार से गूंज उठा. मृतकों में चार मजदूर बांदा जिले और दो हमीरपुर के निवासी बताए जा रहे हैं. 

SDRF अधिकारियों ने बताया कि रात ढाई बजे शुरू हुआ रेस्क्यू अभियान सुबह तक चला और सभी फंसे मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया. बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की ओर से करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से 700 मीटर लंबा दो लेन का पुल बनाया जा रहा था. मोराकांड से कुरारा गांव को जोड़ने वाले इस पुल का निर्माण मार्च 2024 में शुरू हुआ था और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना था.