टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अक्सर झारखंड नाम से जल जंगल जमीन और प्राकृतिक संसाधनों और घने जंगलों के लिए जाना जाता है. यहां की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और खेती, मजदूरी तथा प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है. ऐसे में ग्रामीण परिवारों को रोजगार देने के साथ-साथ पर्यावरण को सुरक्षित रखना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है. झारखंड की बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ एससी, एसटी, भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को रोजगार व स्थायी आजीविका के अवसर देना है. योजना मनरेगा के तहत संचालित की जाती है.
पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार पर जोर
बिरसा हरित ग्राम योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना है. योजना के तहत आम और निजी भूमि पर ब्लॉक तथा रैखिक तरीके से पौधरोपण की गतिविधियां संचालित की जाती हैं. इससे खाली और अनुपयोगी जमीन को हरित क्षेत्र में बदलने में मदद मिल सकती है. पेड़-पौधों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण के साथ मिट्टी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष ग्रामीण रोजगार से भी जुड़ा है. योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, भूमिहीन परिवारों और अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी जाती है. इससे ऐसे परिवारों को अपने ही क्षेत्र में काम के अवसर मिल सकते हैं. योजना को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा के तहत लागू किया गया है.
तीन चरणों में किया जाता है पौधरोपण
बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत वृक्षारोपण को एक व्यवस्थित मॉडल के अनुसार आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता है. इसके लिए तीन चरणों में पौधों की देखभाल और विकास की प्रक्रिया अपनाई जाती है. केवल पौधे लगाने तक योजना को सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उनके संरक्षण और बेहतर विकास पर भी ध्यान दिया जाता है.
पौधरोपण के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार और उपयोगी पेड़ों को बढ़ावा देने से आने वाले समय में परिवारों को अतिरिक्त आय का जरिया भी मिल सकता है. खासकर आम जैसे फलदार पौधों से भविष्य में उत्पादन होने पर ग्रामीण परिवार अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. इस तरह योजना को पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है.
हाशिए पर रहने वाले परिवारों को मिलेगा फायदा
योजना में उन परिवारों को विशेष रूप से शामिल करने का उद्देश्य है, जिनके पास आजीविका के सीमित साधन हैं. भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ग्रामीण रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना योजना का अहम हिस्सा है. वहीं एससी और एसटी समुदायों को योजना से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.
ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ने से लोगों को काम के लिए दूसरे स्थानों पर जाने की जरूरत कम हो सकती है. साथ ही, स्थानीय स्तर पर पौधरोपण और उससे जुड़ी गतिविधियों से गांवों में रोजगार का माहौल तैयार हो सकता है.
हरियाली बढ़ाने के साथ टिकाऊ आजीविका का लक्ष्य
बिरसा हरित ग्राम योजना को केवल वृक्षारोपण की योजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. इसका उद्देश्य पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाना है. अधिक से अधिक क्षेत्र को हरित बनाने के साथ ग्रामीण परिवारों को आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराना इसका अहम लक्ष्य है.
अगर लगाए गए पौधों की सही तरीके से देखभाल और संरक्षण किया जाए, तो आने वाले वर्षों में इसका लाभ पर्यावरण के साथ ग्रामीण परिवारों को भी मिल सकता है. इस तरह बिरसा हरित ग्राम योजना झारखंड के गांवों में हरियाली, रोजगार और टिकाऊ आजीविका को एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है.
