टीएनपी डेस्क(TNP DESK):बिहार सरकार की ओर से समाज के हर वर्ग के लोगों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. एक तरफ जहां बच्चों को शिक्षा पूरी करने के लिए सरकार आर्थिक मदद देती है. वहीं दूसरी तरफ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी कई योजनाओं के जरिए सहायता दी जा रही है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं संचालित हैं. वहीं अगर गरीब और श्रमिक वर्ग की बात करें तो इनके लिए भी ग्रामीण रोजगार की व्यवस्था की गई है. इसी कड़ी में अब ग्रामीण रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन किया गया है. इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को रोजगार मिलता है. आखिर इस योजना का लाभ किन लोगों को मिलेगा और इसके लिए कैसे आवेदन करना होगा. आइए जानते हैं.
100 के बजाए 125 दिन के रोजगार की गारंटी
आपको बता दें कि मनरेगा योजना के तहत पहले 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती थी. अगर रोजगार की मांग करने के बाद निर्धारित समय में काम नहीं मिलता था तो नियमों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान था. वहीं योजना में अब बदलाव कर दिया गया है, जहां 100 की जगह 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है. वहीं रोजगार नहीं मिलने पर श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिए जाने का भी प्रावधान है. इस नई व्यवस्था का लाभ बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को भी मिलेगा. खासकर ऐसे परिवार, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक काम करने के लिए तैयार हैं और रोजगार की मांग करते हैं, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है. बिहार में बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों और शहरों की ओर पलायन करते हैं. ऐसे में गांव में ही 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलने से उन्हें बाहर जाने की मजबूरी कम हो सकती है और परिवार की आमदनी को भी सहारा मिल सकता है.
पढिए कौन उठा सकता है योजना का लाभ
पुरानी मनरेगा व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की गारंटी दी जाती थी. अब नई व्यवस्था में इसे बढ़ाकर 125 दिन किया गया है. हालांकि 125 दिन का रोजगार हर व्यक्ति को अलग-अलग नहीं, बल्कि पात्र ग्रामीण परिवार को मिलता है. परिवार के वयस्क सदस्य रोजगार की मांग कर सकते हैं. अगर रोजगार की मांग करने के बाद निर्धारित समय के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो नियमों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता मिलने का भी प्रावधान है.योजना के तहत मजदूरी का भुगतान सीधे मजदूर के बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से किया जाता है. इससे मजदूरों को उनका पैसा सीधे खाते में मिलता है और भुगतान में पारदर्शिता बनी रहती है.
आवेदन कैसे करें
ग्रामीण रोजगार का लाभ लेने के लिए पात्र परिवार को अपने गांव की ग्राम पंचायत में रोजगार की मांग करनी होती है. अगर परिवार के पास पहले से जॉब कार्ड है तो उसी के आधार पर रोजगार की मांग की जा सकती है. जिन परिवारों का जॉब कार्ड नहीं बना है, उन्हें ग्राम पंचायत में जॉब कार्ड के लिए आवेदन करना होता है. आवेदन के बाद पंचायत स्तर पर पात्रता और परिवार की जानकारी का सत्यापन किया जाता है. रोजगार की मांग दर्ज होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम उपलब्ध कराया जाता है.
जरूरी दस्तावेजों की बात करें तो आम तौर पर जॉब कार्ड बनवाने के लिए परिवार के सदस्यों की जानकारी, पहचान से जुड़े दस्तावेज, बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते की जानकारी, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो जैसी जानकारी मांगी जा सकती है. दस्तावेजों की सटीक सूची स्थानीय प्रशासन और लागू नियमों के अनुसार अलग हो सकती है. इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी ग्राम पंचायत या संबंधित ग्रामीण विकास कार्यालय से जरूरी दस्तावेजों की पुष्टि कर लेना बेहतर है.
